केरल HC ने रद्द की व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही, कहा- 'महिला का अपनी इच्छा से होटल जाना...'
केरल हाई कोर्ट ने शादीशुदा महिला के साथ शादी का कथित वादा कर यौन संबंध बनाने के आरोप में एक व्यक्ति के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी।

केरल हाई कोर्ट ने शादीशुदा महिला के साथ शादी का कथित वादा कर यौन संबंध बनाने के आरोप में एक व्यक्ति के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी। न्यायमूर्ति जोबिन सेबेस्टियन ने कहा कि यदि कोई विवाहित महिला अपनी इच्छा से किसी पुरुष के साथ होटल जाती है और उसके साथ यौन संबंध बनाती है, तो केवल शादी का वादा किए जाने के आरोप के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि संबंध उसी वादे के कारण बने थे।
मामला भारतीय न्याय संहिता की धारा 69 के तहत दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा था। अभियोजन के अनुसार, आरोपी ने शिकायतकर्ता से शादी करने का झूठा वादा किया और उसे होटल ले गया। आरोप था कि वहां उसके भोजन में कथित तौर पर नशीला पदार्थ मिलाकर उसके साथ यौन संबंध बनाए गए। महिला ने यह भी आरोप लगाया था कि आरोपी ने उसकी आपत्तिजनक तस्वीरें खींचीं और उन्हें वाट्सऐप पर भेजा। आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 69 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66ई के तहत मामला दर्ज किया गया था।
बाद में आरोपी और शिकायतकर्ता के बीच विवाद का आपसी समझौता हो गया। इसके बाद आरोपी ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर प्राथमिकी और आपराधिक कार्यवाही रद्द करने की मांग की। शिकायतकर्ता ने भी याचिका के समर्थन में बयान दिया। अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि दोनों पक्षों के बीच विवाद सुलझ चुका है। हालांकि, हाई कोर्ट ने कहा कि आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और केवल आपसी समझौते के आधार पर उन्हें समाप्त नहीं किया जा सकता।
अदालत ने इसलिए यह जांच की कि आरोपों को प्रथम दृष्टया सही मानने पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 69 के तहत अपराध बनता है या नहीं। अदालत ने पाया कि शिकायतकर्ता का विवाह पहले से कायम था और वह आरोपी के साथ अपनी इच्छा से होटल के कमरे में गई थी, जहां दोनों के बीच यौन संबंध बने। हाई कोर्ट ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में केवल शादी के वादे का आरोप यह साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है कि महिला की सहमति केवल उसी वादे से हासिल की गई थी।
अदालत के अनुसार, उपलब्ध सामग्री से यह संकेत नहीं मिलता कि महिला की सहमति किसी झूठे विवाह वादे या अन्य धोखाधड़ीपूर्ण तरीके से प्राप्त की गई थी। अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से धारा 69 के तहत अपराध बनता नहीं दिखता। पक्षों के बीच समझौते और मामले में सफल अभियोजन की कम संभावना को देखते हुए हाई कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी।





