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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 4:49 · नई दिल्ली संस्करण

कोल्हान में नक्सल विरोधी अभियान को बड़ी सफलता, 4 हार्डकोर नक्सलियों का आत्मसमर्पण

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
कोल्हान में नक्सल विरोधी अभियान को बड़ी सफलता, 4 हार्डकोर नक्सलियों का आत्मसमर्पण

पश्चिमी सिंहभूम। झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में नक्सल विरोधी अभियान को मंगलवार को बड़ी सफलता मिली। चाईबासा स्थित कोल्हान पुलिस मुख्यालय में झारखंड सरकार की उग्रवादी आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर चार हार्डकोर नक्सलियों ने पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के समक्ष हथियार डालकर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया।

आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में दस लाख रुपये के इनामी जोनल कमांडर सालुका कयाम उर्फ भुवनेश्वर, एक लाख रुपये के इनामी कोदोमुनी कोड़ा, अनिता तामसोय उर्फ अनिता कयाम और पिंकी शामिल हैं। आत्मसमर्पण के दौरान नक्सलियों ने अपने पास मौजूद हथियार, कारतूस और नक्सली गतिविधियों में इस्तेमाल होने वाली अन्य सामग्री पुलिस को सौंप दी।

कार्यक्रम के दौरान कोल्हान के उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) अनुरंजन किस्टोपा, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) चाईबासा के डीआईजी, पश्चिमी सिंहभूम के पुलिस अधीक्षक (एसपी) अमित रेणु, सरायकेला-खरसावां के एसपी मनोज स्वर्गियारी समेत दोनों जिलों के पुलिस पदाधिकारी और केंद्रीय सुरक्षा बलों के अधिकारी मौजूद रहे।

पुलिस के अनुसार, दस लाख रुपये का इनामी सालुका कयाम उर्फ भुवनेश्वर नक्सली संगठन में जोनल कमांडर के रूप में सक्रिय था। वहीं, एक लाख रुपये के इनामी कोदोमुनी कोड़ा भी संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था। अनिता तामसोय उर्फ अनिता कयाम और पिंकी लंबे समय से नक्सली गतिविधियों से जुड़ी थीं। सालुका कयाम, कोदोमुनी कोड़ा और पिंकी ने पश्चिमी सिंहभूम पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया, जबकि अनिता तामसोय उर्फ अनिता कयाम ने सरायकेला-खरसावां पुलिस के समक्ष हथियार डाले।

पुलिस की ओर से बताया गया कि पिछले चार वर्षों के दौरान कोल्हान क्षेत्र में अब तक 75 नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं। इसके अलावा कई बड़े नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि कुछ मुठभेड़ों में मारे भी गए हैं। मिसिर बेसरा समेत कई हार्डकोर नक्सलियों की गिरफ्तारी को नक्सली संगठन के लिए बड़ा झटका माना गया है।

करीब तीन दशक तक कोल्हान क्षेत्र नक्सलवाद की चुनौती से प्रभावित रहा है। पश्चिमी सिंहभूम के घने जंगलों और दुर्गम इलाकों में नक्सली संगठन लंबे समय तक अपनी गतिविधियां संचालित करते रहे। इस दौरान पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के कई अधिकारी और जवान नक्सली हिंसा में शहीद हुए।

सुरक्षा बलों के लगातार अभियानों, मजबूत खुफिया तंत्र और ग्रामीण इलाकों में पुलिस की बढ़ती पहुंच के कारण क्षेत्र में नक्सली संगठन का प्रभाव लगातार सिमट रहा है। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की संख्या में बढ़ोतरी को भी सुरक्षा बल नक्सल विरोधी अभियान की महत्वपूर्ण उपलब्धि मान रहे हैं।

कोल्हान डीआईजी अनुरंजन किस्टोपा ने चार नक्सलियों के आत्मसमर्पण को नक्सल विरोधी अभियान की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने अभियान में सहयोग करने वाली केंद्रीय एजेंसियों, सुरक्षा बलों और पुलिस पदाधिकारियों के प्रति आभार जताया। साथ ही नक्सल हिंसा के दौरान शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि दी।

डीआईजी ने कहा कि जो नक्सली अभी भी संगठन में सक्रिय हैं, उन्हें हथियार छोड़कर सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का लाभ उठाते हुए मुख्यधारा में लौटना चाहिए।

उन्होंने बताया कि फिलहाल असीम मंडल का दस्ता क्षेत्र में प्रमुख रूप से सक्रिय बचा है। उसकी गिरफ्तारी के लिए सुरक्षा बल लगातार अभियान चला रहे हैं। डीआईजी ने असीम मंडल और उसके दस्ते में शामिल नक्सलियों से भी हथियार छोड़ने, मुख्यधारा में लौटने और सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाने की अपील की।

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