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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:35 · नई दिल्ली संस्करण

चुनाव आयोग का टीएमसी को बड़ा झटका: फ्रीज किया पार्टी का अधिकार और सिंबल, नए नाम सुझाने के निर्देश

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
चुनाव आयोग का टीएमसी को बड़ा झटका: फ्रीज किया पार्टी का अधिकार और सिंबल, नए नाम सुझाने के निर्देश

चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को एक बड़ा झटका दिया है, जिसके तहत पार्टी के दोनों प्रतिद्वंद्वी धड़ों के लिए उसके नाम और चुनाव चिन्ह फूल और घास को फिलहाल फ्रीज कर दिया गया है। इसका मतलब है कि अब टीएमसी के दोनों में से कोई भी गुट आगामी उपचुनावों में इस चुनाव चिन्ह का इस्तेमाल नहीं कर पाएगा। राज्य में नंदीग्राम और रजीनगर सीटों पर होने वाले उपचुनावों को देखते हुए आयोग ने दोनों धड़ों से अपनी पार्टी के लिए नए नाम और चुनाव चिन्ह सुझाने को कहा है।

चुनाव आयोग ने अपने इस फैसले के लिए इलेक्शन सिंबल (रिजर्वेशन एंड एलॉटमेंट) ऑर्डर, 1968 के पैरा 15 को आधार बनाया है। यह आदेश राजनीतिक दलों की पहचान और उनके चुनाव चिन्हों के आवंटन को नियंत्रित करता है, विशेष रूप से पार्टी के भीतर विवाद की स्थिति में। पैरा 15 का मूल प्रावधान यह अधिकार देता है कि जब किसी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के दो या अधिक धड़े खुद को वही पार्टी बताते हैं, तो आयोग उपलब्ध तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करने तथा संबंधित पक्षों को सुनने के बाद यह तय कर सकता है कि इनमें से कौन-सा धड़ा उस मान्यता प्राप्त पार्टी का प्रतिनिधित्व करता है या कोई भी नहीं।

यह फैसला दोनों प्रतिद्वंद्वी धड़ों पर बाध्यकारी होता है। सुप्रीम कोर्ट ने भी 1971 के सादिक अली बनाम चुनाव आयोग मामले में पैरा 15 की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा था। मौजूदा मामले में, टीएमसी के दोनों धड़ों ने पार्टी के नाम और आरक्षित चुनाव चिन्ह फूल और घास पर अपना दावा पेश किया है। आयोग ने माना है कि उसके सामने दो प्रतिद्वंद्वी समूह हैं और विवाद पर पैरा 15 के तहत अंतिम फैसला अभी बाकी है। चूंकि पश्चिम बंगाल में 6 अक्टूबर को उपचुनाव होने हैं और पैरा 15 के तहत पूरी सुनवाई और अंतिम फैसला करने में समय लग सकता है, इसलिए आयोग ने अंतरिम व्यवस्था के तौर पर नाम और चुनाव चिन्ह को फ्रीज कर दिया है।

यह मौजूदा आदेश अंतिम फैसला नहीं है; आयोग ने दोनों धड़ों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह चुनने को कहा है, जबकि पार्टी के नाम और मूल चुनाव चिन्ह पर अंतिम निर्णय पैरा 15 की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा। आयोग के अंतरिम आदेश के अनुसार, एक धड़े का नेतृत्व ममता बनर्जी कर रही हैं और दूसरे का नेतृत्व अरूप रॉय के पास है। कुछ रिपोर्टों में बागी खेमे को रीताब्रत बनर्जी से भी जोड़ा गया है। दोनों पक्षों को 18 सितंबर तक अपनी पसंद के तीन-तीन संभावित नाम और तीन-तीन मुक्त चुनाव चिन्ह सुझाने के लिए कहा गया है। पैरा 15 का उपयोग पहले भी बड़े राजनीतिक दलों में टूट के दौरान किया गया है, जिसमें 1969 में कांग्रेस का विभाजन एक प्रमुख उदाहरण है, जब चुनाव आयोग ने इस प्रावधान के तहत विवाद का निपटारा किया था।

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