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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 8:34 · नई दिल्ली संस्करण

वफादारी बिकती है, लेकिन बालासाहेब की विरासत पीढ़ियों तक रहेगी: राज ठाकरे

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
वफादारी बिकती है, लेकिन बालासाहेब की विरासत पीढ़ियों तक रहेगी: राज ठाकरे

मुंबई। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने शिवसेना संस्थापक स्वर्गीय बाळासाहेब ठाकरे की जयंती पर एक भावुक संदेश साझा किया। राज ठाकरे ने बाळासाहेब के व्यक्तित्व, उनके राजनीतिक दर्शन, मराठी अस्मिता के प्रति उनके अटूट प्रेम और वर्तमान राजनीति पर तीखी टिप्पणी की।

राज ठाकरे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, "आज स्वर्गीय बालासाहेब की 100वीं जयंती है। इतिहास में कई लोगों ने उनकी जन्म शताब्दी मनाई है और मनाएंगे, लेकिन ऐसा बहुत कम होता है कि कोई इंसान जिंदा न रहने पर भी लोगों की यादों में बना रहे और वह इंसान आज भी किसी प्रांत की राजनीति और सामाजिक मामलों को आकार देता रहे। ऐसा सिर्फ बालासाहेब के मामले में ही हो सकता है।

और इसीलिए मुझे पूरा यकीन है कि बालासाहेब सिर्फ 100 साल बाद ही नहीं, बल्कि अपने जन्म के दो सौवें साल में भी लोगों की यादों में बने रहेंगे। तभी बालासाहेब को याद करने वाले मराठी लोग बंटे नहीं, टूटे नहीं, कुचले नहीं और जो चुपचाप अन्याय सहते हैं।"

मनसे प्रमुख ने कहा कि आज वफादारी आसानी से बिक जाती है। उसूल आसानी से फेंक दिए जाते हैं और राजनीति पूरी तरह से प्रैक्टिकल हो गई है।

आज राजनीति में सफलता इस बात से मापी जाती है कि चुनावी राजनीति में कितनी सफलता मिली और उसके लिए क्या-क्या हथकंडे अपनाए गए, न कि इस बात से कि कौन से मुद्दे सामने लाए गए, कितनी क्षेत्रीय और भाषाई पहचान जिंदा रखी गई। बालासाहेब के समय में ऐसी कोई उम्मीद नहीं थी और अगर होती भी, तो उन्होंने उम्मीद छोड़ दी होती। उन्हें खुद सत्ता पसंद नहीं थी, लेकिन आम कार्यकर्ताओं को सत्ता की पोजीशन पर बिठाकर उन्हें संतुष्टि मिलती थी। सत्ता आती-जाती रहती है। आज के शासक कल भले ही नाम के नाम रह जाएं, लेकिन बहुत कम लोग ऐसा असर डाल पाते हैं जो पीढ़ियों तक रहे। यही असर बालासाहेब की ताकत थी और यही उनकी विरासत है।"

उन्होंने कहा कि बालासाहेब एक विजनरी थे।

उनका विजन आज भी रेलेवेंट लगता है और भविष्य में भी रेलेवेंट रहेगा। इसीलिए वे टाइमलेस रहेंगे। जितना यह सच है कि बालासाहेब जैसा टैलेंट हमें दोबारा कभी नहीं दिखेगा, उतना ही यह भी सच है कि बालासाहेब जैसी पॉलिटिक्स अब कोई नहीं कर पाएगा। लेकिन, यह बालासाहेब की आने वाली पीढ़ियों के हाथ में है कि वे देखें कि उनकी इमेज को कहीं कोई नुकसान न पहुंचे और मराठी भाषा और मराठी लोगों के लिए उन्होंने जो लड़ाई लड़ी, वह जलती रहे। और हम इसे मजबूती से करेंगे, यह मराठी लोगों से हमारा वादा है।

राज ठाकरे ने कहा कि भले ही बालासाहेब को कभी-कभी पॉलिटिक्स में लचीला रुख अपनाना पड़ा, लेकिन मराठी लोगों के लिए उनका प्यार जरा भी कम नहीं हुआ, बल्कि और मजबूत हो गया। ये वो वैल्यूज़ हैं जो हमारे साथ हैं। मैं आज एक बात दोहराता हूं कि अगर वे कभी पूरी तरह से बदली हुई पॉलिटिक्स में लचीला रुख अपनाते भी हैं, तो यह कभी भी मेरे पर्सनल फायदे या मतलब के लिए नहीं होगा।

राज ठाकरे ने आगे कहा कि मैं उन हजारों लोगों में से एक हूं जो बालासाहेब का मराठी भाषा, मराठी इलाके और मराठी लोगों के लिए गहरा प्यार देखकर उनके साथ आए थे। इसलिए, 'बालासाहेब' और 'मराठी' इन दो शब्दों और मेरे महाराष्ट्र के सैनिकों के लिए मेरा भरोसा और प्यार जरा भी कम नहीं होगा। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना की तरफ से स्वर्गीय बालासाहेब की याद में विनम्र श्रद्धांजलि।

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