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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:17 · नई दिल्ली संस्करण

झारखंड में आकाशीय बिजली ने मचाई तबाही, 15 दिनों में 30 से अधिक की मौत, 35 घायल

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
झारखंड में आकाशीय बिजली ने मचाई तबाही, 15 दिनों में 30 से अधिक की मौत, 35 घायल

रांची,। झारखंड में मानसून के साथ आसमान से बरस रही आफत लगातार लोगों की जान ले रही है। राज्य मे 12 जून से अब तक वज्रपात की घटनाओं में 30 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और 35 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।

रविवार को रांची जिले के सोनाहातू में वॉच टावर का निरीक्षण कर रहे वनरक्षक रोशन श्रीवास्तव की वज्रपात से मौत हो गई, जबकि दो अन्य वनकर्मी झुलस गए। लोहरदगा में तीन वर्षीय बच्ची, रांची के बेड़ो में एक किसान, सिल्ली में एक नाबालिग तथा गढ़वा जिले के रंका में आम चुनने गए दो बच्चों की भी बिजली गिरने से मौत हो गई।

24 से 26 जून के बीच भी वज्रपात ने राज्य के कई जिलों में भारी तबाही मचाई।

इस दौरान चतरा, पलामू, जामताड़ा, कोडरमा, देवघर और लोहरदगा समेत विभिन्न जिलों में 12 लोगों की मौत हुई और करीब 18 लोग घायल हुए। लोहरदगा में दो अलग-अलग घटनाओं में दो महिलाओं की जान चली गई, जबकि आठ लोग गंभीर रूप से झुलस गए। 21 से 23 जून के बीच पश्चिमी सिंहभूम के टोकलो में फुटबॉल मैच के दौरान मैदान पर बिजली गिरने से दो खिलाड़ियों की मौत हो गई थी। खूंटी जिले के कर्रा में क्रिकेट खेल रहे युवकों पर वज्रपात होने से एक खिलाड़ी की मौत हुई और 11 अन्य घायल हो गए।

इससे पहले 17 से 19 जून के बीच हजारीबाग, रामगढ़, पलामू, लोहरदगा, गोड्डा और पश्चिमी सिंहभूम में आठ लोगों की मौत दर्ज की गई थी। मानसून के प्रवेश के पहले 24 घंटे के भीतर ही रांची, गढ़वा, चतरा, गिरिडीह, जामताड़ा और सरायकेला-खरसावां में आठ लोगों की जान चली गई थी।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, झारखंड की भौगोलिक संरचना इसे वज्रपात के लिहाज से अत्यधिक संवेदनशील बनाती है।

पठारी भूभाग, घने जंगल, ऊंचे वृक्ष, खनिज संपदा और मानसून के दौरान गर्म एवं ठंडी हवाओं के टकराव से यहां वातावरण में तेजी से विद्युत ऊर्जा विकसित होती है, जिससे बिजली गिरने की घटनाएं अधिक होती हैं। रांची, गुमला, पलामू, बोकारो और पूर्वी सिंहभूम को राज्य के प्रमुख 'लाइटनिंग हॉटस्पॉट' माना जाता है।

क्लाइमेट रेजिलिएंट ऑब्जर्विंग सिस्टम्स प्रमोशन काउंसिल (सीआरओपीसी) और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के आंकड़ों के अनुसार, झारखंड में पिछले पांच वर्षों के दौरान हर साल औसतन 4.36 लाख से अधिक बार आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं दर्ज की गई हैं। पिछले एक दशक में वज्रपात से राज्य में कम से कम 1,669 लोगों की मौत हो चुकी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है, क्योंकि दूरदराज के ग्रामीण इलाकों की कई घटनाएं आधिकारिक रिकॉर्ड तक नहीं पहुंच पातीं। वज्रपात से होने वाली मौतों में सबसे अधिक संख्या किसानों, खेतिहर मजदूरों, मवेशी चराने वालों, महिलाओं और खुले स्थानों पर काम करने वाले लोगों की होती है।

मौसम विभाग ने राज्य के अधिकांश जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी करते हुए लोगों से गरज-चमक के दौरान खुले खेतों, पेड़ों, बिजली के खंभों और जलाशयों से दूर रहने की सलाह दी है। राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने भी लोगों से मौसम खराब होने पर सुरक्षित स्थान पर शरण लेने और किसी भी स्थिति में खुले मैदान में नहीं रुकने की अपील की है।

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