इस खतरनाक वजह से 40 उम्र बाद वाली महिलाओं को चीन भेज रहा है उत्तर कोरिया, जानकर कांप जाएंगे आप
नॉर्थ कोरिया अब चीन की फैक्ट्रियों में जवान लड़कियों की जगह 40-45 साल की शादीशुदा महिलाओं को भेज रहा है। Daily NK के मुताबिक जिलिन प्रांत की गारमेंट फैक्ट्रियों में ऐसी महिलाओं की संख्या बढ़ी है। इसके पीछे बड़ी वजह है - भागने से रोकना। शादीशुदा महिला का पति-बच्चा उत्तर कोरिया में बंधक जैसा रहता है, इसलिए वो भागेगी नहीं। सरकार उनकी 90% सैलरी भी जब्त कर लेती है।

नॉर्थ कोरिया ने अचानक अपनी पॉलिसी बदल दी है। अब तक चीन की फैक्ट्रियों में काम करने के लिए कुंवारी और जवान लड़कियों को भेजा जाता था, लेकिन 2026 में तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। अब 40-45 साल की शादीशुदा महिलाओं को चीन भेजा जा रहा है। इसके पीछे की वजह जानकर हर कोई हैरान है।मीडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल चीन के जिलिन प्रांत की गारमेंट और सी-फूड प्रोसेसिंग फैक्ट्रियों में भेजी गई ज्यादातर महिलाएं 45 साल के आसपास की हैं। एक सूत्र ने बताया, "पहले बहुत सारी कुंवारी जवान लड़कियां आती थीं, लेकिन अब 40 प्लस महिलाओं की संख्या चौंका रही है।" इन महिलाओं में से ज्यादातर के छोटे-छोटे बच्चे उत्तर कोरिया में ही छूट गए हैं।
लंबे समय तक बच्चों से दूर रहने के कारण वो मानसिक तनाव से गुजर रही हैं। पिछले महीने तो चांगबाई में काम कर रही एक महिला बॉर्डर तक भाग गई थी, सिर्फ अपने परिवार से मिलने के लिए। लेकिन उसे वापस पकड़कर फैक्ट्री भेज दिया गया। इसके पीछे किम जोंग उन सरकार की 3 बड़ी रणनीतियां हैं: भागने से रोकने के लिए परिवार को बंधक बनाना: जवान लड़कियां अकेली होती हैं, उनके भागने और दक्षिण कोरिया चले जाने का खतरा ज्यादा रहता है। लेकिन शादीशुदा महिला जिसके पति-बच्चे उत्तर कोरिया में हैं, वो कभी भागने की हिम्मत नहीं करेगी। परिवार एक तरह से सरकार के पास बंधक है। अगर महिला भागी तो परिवार को सख्त सजा मिलेगी।
जवान लड़कियों की कमी: कई एक्सपर्ट का मानना है कि उत्तर कोरिया में अब जवान, अविवाहित लड़कियों की कमी हो गई है, जिन्हें विदेश भेजा जा सके। इसलिए अब सरकार को शादीशुदा महिलाओं पर निर्भर होना पड़ रहा है। विदेशी मुद्रा की भूख: संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों के बावजूद उत्तर कोरिया ने इस साल गर्मियों में एक महीने में ही 10,000 मजदूर चीन भेजे हैं। UN Resolution 2397 के तहत 2019 तक सभी मजदूरों को वापस भेजना था, लेकिन चीन और उत्तर कोरिया दोनों इसे खुलेआम तोड़ रहे हैं।
रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि चीन की कंपनियां जो सैलरी देती हैं, उसका सिर्फ 10% ही मजदूरों को मिलता है। बाकी 90% पैसा 'लॉयल्टी फंड' और 'रिवोल्यूशनरी फंड' के नाम पर किम जोंग उन की सरकार जब्त कर लेती है। ये मजदूर दिन में 16-16 घंटे काम करते हैं, न कोई लेबर कॉन्ट्रैक्ट है, न बीमा, न कोई अधिकार। कुल मिलाकर ये नया पैंतरा मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन है, जहां मांओं को उनके बच्चों से सालों के लिए अलग कर विदेशी मुद्रा कमाने की मशीन बनाया जा रहा है।
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