ड्रोन तकनीक का खौफनाक सौदा: रूस-उत्तर कोरिया की धुरी से दहल उठेगा कोरियाई प्रायद्वीप!

रूस में बन रहे उन्नत गेरान श्रेणी के ड्रोन और उनकी मारक तकनीक को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही हैं, क्योंकि इसका असर अब केवल यूक्रेन युद्ध तक सीमित नहीं रहने वाला है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि रूस ने इन घातक ड्रोन्स या उनकी निर्माण तकनीक को उत्तर कोरिया तक पहुंचा दिया, तो इससे कोरियाई प्रायद्वीप और एशिया के सामरिक संतुलन पर कितना गहरा और खतरनाक असर पड़ेगा। रूस के तातारस्तान स्थित अलाबुगा विशेष आर्थिक क्षेत्र में बड़े पैमाने पर गेरान ड्रोन का उत्पादन किया जाता है, और रिपोर्ट्स के अनुसार वहां संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों से बचने के लिए छात्र वीजा की आड़ में हजारों उत्तर कोरियाई नागरिकों को कामगारों के रूप में भेजा गया है।
बहुपक्षीय प्रतिबंध निगरानी समूहों की रिपोर्टों का अनुमान है कि रूस में ड्रोन निर्माण से जुड़ी गतिविधियों में लगभग पच्चीस हजार तक उत्तर कोरियाई नागरिक शामिल हो सकते हैं, जिन्हें इस पूरी अत्याधुनिक तकनीकी प्रक्रिया की गहरी जानकारी मिल रही है। रूसी सैन्य और रक्षा क्षेत्रों में काम कर रहे इन उत्तर कोरियाई कामगारों के माध्यम से यदि गेरान ड्रोन की तकनीक प्योंगयांग के हाथों में पहुंचती है, तो यह दक्षिण कोरिया और जापान जैसे देशों के लिए एक विकट चुनौती बन सकती है। रूस द्वारा यूक्रेन में व्यापक रूप से इस्तेमाल किए जाने वाले गेरान-2 और विशेष रूप से छह सौ किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ने वाले तथा नब्बे किलोग्राम तक के विस्फोटक ले जाने में सक्षम गेरान-5 जैसे ड्रोन अपनी अत्यधिक गति और सटीक मारक क्षमता के कारण दुश्मन के रक्षा तंत्र को भेदने में माहिर माने जाते हैं।
रूसी सैन्य विश्लेषकों और ब्लॉग्स के हालिया आकलन के अनुसार, यदि उत्तर कोरिया को ऐसी लंबी दूरी की और तेज रफ्तार ड्रोन क्षमता हासिल हो जाती है, तो पारंपरिक सैन्य ठिकानों के अलावा उसके निशाने पर दक्षिण कोरिया और जापान के प्रमुख औद्योगिक और ऊर्जा प्रतिष्ठान भी आ सकते हैं। इस संभावित भू-राजनीतिक खतरे के चलते दक्षिण कोरिया के बड़े तकनीकी और विनिर्माण केंद्रों, विशेष रूप से सीमा के करीब स्थित सैमसंग जैसी दिग्गज कंपनियों के उत्पादन संयंत्रों और अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। इसके साथ ही, जापान के महत्वपूर्ण तेल भंडारण केंद्रों, बंदरगाहों, रिफाइनरियों तथा नागोया क्षेत्र में स्थित टोयोटा और मित्सुबिशी हेवी इंडस्ट्रीज जैसे विशाल औद्योगिक प्रतिष्ठानों पर भी सुरक्षा का बड़ा साया मंडराने लगा है।





