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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:15 · नई दिल्ली संस्करण

झारखंड: जेएसएससी-सीजीएल और सीडीपीओ नियुक्तियां रद्द करने के आदेश पर रोक

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
झारखंड: जेएसएससी-सीजीएल और सीडीपीओ नियुक्तियां रद्द करने के आदेश पर रोक

रांची। झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी की भर्ती परीक्षाओं और उनसे हुई नियुक्तियों को रद्द करने के फैसले के खिलाफ दायर चार अलग-अलग याचिकाओं पर शुक्रवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने जेएसएससी-सीजीएल और सीडीपीओ (बाल विकास परियोजना पदाधिकारी) परीक्षा से संबंधित नियुक्तियों को रद्द करने के सरकारी आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी।

इससे पहले गुरुवार को कोर्ट ने जेपीएससी 11 से 13 सिविल सर्विस और फूड सेफ्टी ऑफिसर्स की परीक्षा के जरिए हुई नियुक्तियों को रद्द करने के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए सात सितंबर तक का समय दिया है।

प्रार्थियों को सरकार के जवाब पर 14 सितंबर तक प्रति-उत्तर दाखिल करने का निर्देश दिया गया। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।

प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा और अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने पक्ष रखा।

सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता रोहित राय ने अदालत से आग्रह किया कि इस तरह के सभी मामलों में सरकार को शपथपत्र दाखिल करने के लिए एक निश्चित समयसीमा निर्धारित की जाए। प्रार्थियों ने सरकार की ओर से सीडीपीओ परीक्षा का विज्ञापन रद्द किए जाने के फैसले को चुनौती दी है। वहीं, जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा और उससे संबंधित नियुक्तियों को रद्द करने के सरकारी आदेश के खिलाफ भी याचिका दाखिल की गई है।

कुछ प्रार्थियों ने जेपीएससी की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा और फूड सेफ्टी ऑफिसर की नियुक्तियां रद्द करने के सरकार के फैसले को भी चुनौती दी है। इन मामलों में अदालत पहले ही अंतरिम राहत देते हुए नियुक्तियां रद्द करने के आदेश पर रोक लगा चुकी है। अदालत ने शुक्रवार की सुनवाई में सीडीपीओ और जेएसएससी-सीजीएल से संबंधित मामलों में राज्य सरकार और संबंधित आयोग से जवाब मांगा है।

सरकार को यह बताना होगा कि इन परीक्षाओं और नियुक्तियों को रद्द करने के पीछे क्या आधार और जांच में सामने आए तथ्य हैं।

उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रही सीआईडी जांच के आधार पर 18 अगस्त की देर रात बड़े स्तर पर भर्ती प्रक्रियाओं के संबंध में फैसला लिया था।

सरकार ने 22 परीक्षाओं को रद्द करने, छह परीक्षाओं की प्रक्रिया स्थगित करने और वर्ष 2014 से हुई 17 अन्य नियुक्ति परीक्षाओं को जांच के दायरे में रखने की घोषणा की थी।

इसके बाद कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग की ओर से इस संबंध में अधिसूचनाएं जारी की गई थीं।

इन फैसलों से बड़ी संख्या में ऐसे अभ्यर्थी प्रभावित हुए हैं, जिन्होंने संबंधित परीक्षाएं पास कर नियुक्तियां हासिल की थीं और कई मामलों में सेवा भी शुरू कर दी थी। हाईकोर्ट में इन मामलों की सुनवाई के साथ अब सरकार के फैसले के कानूनी आधार, जांच के निष्कर्ष और नियुक्त अभ्यर्थियों के अधिकारों से जुड़े सवाल महत्वपूर्ण हो गए हैं।

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