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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:44 · नई दिल्ली संस्करण

झारखंड नगर निकायः 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में चुनाव प्रचार पर अधिकतम 25 लाख खर्च कर सकेंगे मेयर और अध्यक्ष पद के प्रत्याशी

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
झारखंड नगर निकायः 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में चुनाव प्रचार पर अधिकतम 25 लाख खर्च कर सकेंगे मेयर और अध्यक्ष पद के प्रत्याशी

रांची। झारखंड में 48 शहरी स्थानीय निकायों के लिए 23 फरवरी को होने वाले नगर निकाय चुनाव में कुल 43 लाख 33 हजार 574 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, इनमें 22 लाख 7 हजार 203 पुरुष, 21 लाख 26 हजार 227 महिला और 144 ट्रांसजेंडर मतदाता शामिल हैं।

ये मतदाता राज्य में 9 नगर निगमों में मेयर, 20 नगर परिषदों और 19 नगर पंचायतों में अध्यक्ष के अलावा कुल 1087 वार्ड पार्षदों के लिए वोट करेंगे।

मंगलवार को राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही शहरी क्षेत्रों में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। झारखंड राज्य निर्वाचन आयुक्त अलका तिवारी ने बताया कि इस निर्वाचन के लिए राज्यभर में कुल 4,304 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। ये मतदान केंद्र 2,129 भवनों में स्थित होंगे।

उल्लेखनीय है कि झारखंड में नगर निकाय चुनाव वर्ष 2020 से लंबित थे।

उस समय कोरोना महामारी के कारण सरकार ने चुनाव स्थगित कर दिए थे, जिसके बाद विभिन्न कानूनी और प्रक्रियात्मक कारणों से चुनाव लगातार टलते रहे। राज्य निर्वाचन आयोग ने नगर निकाय चुनाव के लिए उम्मीदवारों के चुनावी खर्च की सीमा भी तय कर दी है।

आयोग के मुताबिक, जिन नगर निगमों की जनसंख्या 2011 की जनगणना के अनुसार 10 लाख या उससे अधिक है, वहां महापौर या अध्यक्ष पद के उम्मीदवार अधिकतम 25 लाख रुपये तक खर्च कर सकेंगे, जबकि वार्ड पार्षदों के लिए यह सीमा पांच लाख रुपये निर्धारित की गई है।

वहीं, जिन नगर निगमों की आबादी 10 लाख से कम है, वहां महापौर/अध्यक्ष के लिए 15 लाख रुपये और वार्ड पार्षदों के लिए तीन लाख रुपये खर्च की सीमा तय की गई है।

नगर परिषदों की बात करें तो जिन परिषदों की जनसंख्या एक लाख या उससे अधिक है, वहां महापौर या अध्यक्ष अधिकतम 10 लाख रुपये और वार्ड पार्षद दो लाख रुपये तक खर्च कर सकेंगे।

एक लाख से कम आबादी वाले नगर परिषद क्षेत्रों में यह सीमा क्रमशः छह लाख रुपये और डेढ़ लाख रुपये तय की गई है। इसके अलावा, 12 हजार या उससे अधिक और 40 हजार से कम आबादी वाली नगर पंचायतों में महापौर या अध्यक्ष के लिए पांच लाख रुपये और वार्ड पार्षद के लिए एक लाख रुपये की खर्च सीमा निर्धारित की गई है।

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