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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 6:21 · नई दिल्ली संस्करण

झारखंड शराब घोटाला: एसीबी ने छत्तीसगढ़ का कारोबारी नवीन केडिया को किया गिरफ्तार

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
झारखंड शराब घोटाला: एसीबी ने छत्तीसगढ़ का कारोबारी नवीन केडिया को किया गिरफ्तार

रांची। झारखंड के बहुचर्चित शराब घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक प्रमुख आरोपी नवीन केडिया को गिरफ्तार कर लिया है। केडिया को गोवा से गिरफ्तार किया गया, वह छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले का रहने वाला है और लंबे समय से फरार था।

एसीबी की टीम अब उसे ट्रांजिट रिमांड पर रांची लाने की तैयारी में जुटी है, जहां उसे अदालत में पेश किया जाएगा।

इसके बाद मामले से जुड़े अहम बिंदुओं पर उससे रिमांड पर गहन पूछताछ की जाएगी।

एसीबी सूत्रों के अनुसार, नवीन केडिया को पहले पूछताछ के लिए तलब किया गया था, लेकिन वह पेश नहीं हुआ। इसके बाद उसने अग्रिम जमानत के लिए अदालत का रुख किया, लेकिन उसकी याचिका खारिज कर दी गई थी। इसके बाद से ही वह फरार चल रहा था। लगातार तकनीकी और मानवीय इनपुट के आधार पर एसीबी ने उसकी लोकेशन ट्रेस की और गोवा से उसे गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की।

जांच के दौरान यह सामने आया कि झारखंड के शराब घोटाले का छत्तीसगढ़ के शराब कारोबारियों से गहरा और संगठित संबंध रहा है।

छत्तीसगढ़ एंटी करप्शन ब्यूरो द्वारा छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच के क्रम में एक कारोबारी सिद्धार्थ सिंघानिया के घर से बरामद एक डायरी ने झारखंड कनेक्शन को उजागर किया था। इस डायरी में झारखंड में शराब कारोबार को नियंत्रित करने के लिए बनाए गए सिंडिकेट, अवरोध पैदा करने वालों की पहचान और उन्हें मैनेज करने की रणनीति का उल्लेख दर्ज था।

एसीबी की जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि झारखंड सरकार द्वारा शराब दुकानों के संचालन और मैनपावर सप्लाई के लिए जिन सात प्लेसमेंट कंपनियों को ठेका दिया गया था, उन्होंने टेंडर की शर्तों का गंभीर उल्लंघन किया।

कंपनियों द्वारा जमा कराई गई बैंक गारंटी फर्जी पाई गई। झारखंड स्टेट बेवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड की आंतरिक ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, इन सात कंपनियों ने फर्जीवाड़े के जरिए राज्य सरकार को करीब 129.55 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाया।

अब तक की जांच में एसीबी ने इस घोटाले की कुल राशि 150 करोड़ रुपए से अधिक आंकी है। इस मामले में पूर्व में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे, रिटायर्ड आईएएस अमित प्रकाश, झारखंड प्रशासनिक सेवा के अधिकारी गजेंद्र सिंह, कारोबारी सिद्धार्थ सिंघानिया और प्रिज्म होलोग्राफी कंपनी के निदेशक विधु गुप्ता की गिरफ्तारी हो चुकी है। हालांकि, समय पर चार्जशीट दाखिल नहीं होने के कारण ज्यादातर आरोपियों को अदालत से जमानत मिल गई थी।

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