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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 9:35 · नई दिल्ली संस्करण

झारखंड में 'ईडी बनाम पुलिस' मामले में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच होगी

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
झारखंड में 'ईडी बनाम पुलिस' मामले में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच होगी

रांची। झारखंड में केंद्रीय जांच एजेंसी (ईडी) और राज्य पुलिस के बीच चल रहे कानूनी टकराव पर बुधवार को झारखंड हाईकोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपी संतोष कुमार की शिकायत पर ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर और इससे संबंधित पूरे मामले की जांच सीबीआई करेगी।

जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुरक्षित रखे गए अपने फैसले में इस मामले को सीबीआई के सुपुर्द करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट का यह आदेश राज्य सरकार और रांची पुलिस के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। ईडी ने अपने अफसरों के खिलाफ एयरपोर्ट थाने में दर्ज कराई गई एफआईआर को गलत बताते हुए इसे निरस्त करने और पूरे प्रकरण की सीबीआई से जांच कराने की मांग की थी।

इस कानूनी लड़ाई की शुरुआत पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कर्मचारी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले के आरोपी संतोष कुमार की एक शिकायत से हुई थी। संतोष ने आरोप लगाया था कि 12 जनवरी को रांची स्थित ईडी कार्यालय में पूछताछ के दौरान अधिकारियों ने उसके साथ मारपीट, दुर्व्यवहार और मानसिक प्रताड़ना की। इस शिकायत के आधार पर रांची पुलिस ने न केवल प्राथमिकी दर्ज की, बल्कि ईडी कार्यालय पहुंचकर छापेमारी जैसी कार्रवाई भी की थी।

पुलिस की इस सक्रियता के बाद राज्य पुलिस और ईडी के बीच भारी तनाव की स्थिति बन गई थी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पुलिस की इस कार्रवाई को दुर्भावनापूर्ण बताते हुए हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल की थी। इससे पहले 16 जनवरी को हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने रांची पुलिस की जांच पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी थी। कोर्ट ने उस वक्त बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा था कि किसी भी केंद्रीय एजेंसी के कामकाज को प्रभावित नहीं किया जा सकता।

इसके साथ ही, अदालत ने ईडी कार्यालय की सुरक्षा की जिम्मेदारी सीआईएसएफ, बीएसएफ या अन्य अर्धसैनिक बल को सौंपने का निर्देश दिया था और सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने को कहा था। इस मामले में अदालत में हुई सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया एसवी राजू, अधिवक्ता एके दास और अधिवक्ता सौरभ कुमार ने पक्ष रखा था, वहीं राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरीय अधिवक्ता एस नागामुथु, महाधिवक्ता राजीव रंजन और अधिवक्ता दीपांकर ने दलील पेश की थी। सूचक की ओर से अधिवक्ता सुमित गाड़ोदिया ने पक्ष रखा था।

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