मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
Rajasthan Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव का ऐलान, 4 चरणों में होगी वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूलमुंबई में CJP का प्रदर्शन पड़ा भारी! जेल भरो आंदोलन पर FIR, आयोजकों में हड़कंपज्ञानेश कुमार पर चले लोकतंत्र की हत्या का मुकदमा! प्रमोद तिवारी का बड़ा हमलाBJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी अब साइकिल पर सवार, समाजवादी पार्टी में हुए शामिलCM Yogi का बड़ा तोहफा: 4.60 लाख छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति, आपके खाते में आई क्या? चेक करेंNoida: सुपरनोवा की 43वीं मंजिल से युवक ने लगाई छलांग, मौके पर दर्दनाक मौत, सोसाइटी में हड़कंपमुंबई प्रदर्शन के बाद CJP का दिल्ली कूच का ऐलान, अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बातगठबंधन में फूट! रायबरेली से डरते थे राहुल गांधी! सपा नेता का बड़ा खुलासा, अखिलेश ने दी थी धमकी

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 6:26 · नई दिल्ली संस्करण

झारखंड हाईकोर्ट ने नगर निगमों में मेयर पद के आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
झारखंड हाईकोर्ट ने नगर निगमों में मेयर पद के आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की

रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य में नगर निगमों को दो वर्गों में बांटने और मेयर पद के आरक्षण की व्यवस्था को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। मंगलवार को चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने शांतनु कुमार चंद्र की ओर से दायर जनहित याचिका पर यह अहम फैसला सुनाया।

याचिकाकर्ता ने राज्य सरकार की उस नीति को चुनौती दी थी, जिसके तहत नगर निकाय चुनाव के लिए झारखंड के कुल नौ नगर निगमों को दो वर्गों, वर्ग ‘क’ और वर्ग ‘ख’ में विभाजित किया गया है। सरकार की अधिसूचना के अनुसार, वर्ग ‘क’ में रांची और धनबाद नगर निगम को शामिल किया गया है, जबकि राज्य के शेष अन्य नगर निगमों को वर्ग ‘ख’ में रखा गया है।

इसी वर्गीकरण के आधार पर मेयर पद के आरक्षण का निर्धारण किया गया था।

याचिका में कहा गया था कि सरकार ने 2011 की जनगणना के आंकड़ों की अनदेखी करते हुए आरक्षण नीति लागू की है। प्रार्थी के अनुसार, 2011 की जनगणना में धनबाद जिले में अनुसूचित जाति की आबादी करीब दो लाख बताई गई है, ऐसे में यहां मेयर पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होना चाहिए था।

इसके विपरीत, सरकार की नीति के तहत धनबाद में मेयर पद को अनारक्षित घोषित कर दिया गया। वहीं दूसरी ओर, गिरिडीह नगर निगम में अनुसूचित जाति की आबादी महज लगभग 30 हजार होने के बावजूद वहां मेयर पद को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित कर दिया गया।

याचिकाकर्ता ने इसे संविधान के समानता और न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ बताते हुए कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की थी।

इस मामले में राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन और अपर महाधिवक्ता सचिन कुमार ने पक्ष रखा। सरकार ने दलील दी कि नगर निगमों का वर्गीकरण और आरक्षण पूरी तरह वैधानिक प्रक्रिया के तहत और संबंधित नियमों के अनुसार किया गया है। सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट के इस फैसले के बाद राज्य में नगर निकाय चुनाव कराने का रास्ता साफ हो गया है।

यह ख़बर दूसरों तक पहुँचाएँ

WhatsAppFacebookX

संबंधित ख़बरें