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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:49 · नई दिल्ली संस्करण

झारखंडः पतरातू के कामेश्वर पांडे हत्याकांड में गैंगस्टर अमन श्रीवास्तव और लखन साव को उम्रकैद

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
झारखंडः पतरातू के कामेश्वर पांडे हत्याकांड में गैंगस्टर अमन श्रीवास्तव और लखन साव को उम्रकैद

रामगढ़। झारखंड के रामगढ़ जिले के चर्चित कामेश्वर पांडे हत्याकांड में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम की अदालत ने शुक्रवार को गैंगस्टर अमन श्रीवास्तव और उसके सहयोगी लखन साव को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने दोनों दोषियों पर 10-10 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया। 7 मई को अदालत ने दोनों को हत्या और आपराधिक साजिश रचने का दोषी करार दिया था।

सजा के बिंदु पर सुनवाई पूरी होने के बाद शुक्रवार को अदालत ने हत्या के मामले में दोनों दोषियों को उम्रकैद और जुर्माने की सजा दी। वहीं धारा 120(बी) के तहत आपराधिक साजिश रचने के आरोप में भी दोनों को आजीवन कारावास और 10 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई। इसके अलावा आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत सात वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई।

अदालत ने कहा कि जुर्माने की राशि जमा नहीं करने पर दोषियों को एक वर्ष का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।

फैसला सुनाए जाने के दौरान न्यायालय परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।

यह मामला पतरातू निवासी 70 वर्षीय कामेश्वर पांडे की हत्या से जुड़ा है। घटना 26 अक्टूबर, 2015 को उस समय हुई थी, जब वह स्थानीय सब्जी बाजार में खरीदारी करने गए थे। इसी दौरान श्रीवास्तव गिरोह के शूटरों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी थी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी। मामले में पवन किशोर पांडे ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी।

सुनवाई के दौरान अदालत में यह तथ्य सामने आया कि अमन श्रीवास्तव ने इलाके में दहशत और अपना वर्चस्व कायम करने के उद्देश्य से हत्या की साजिश रची थी।

जांच में यह भी सामने आया कि कामेश्वर पांडे का किसी आपराधिक गतिविधि से कोई संबंध नहीं था। मामले में पुलिस ने गणेश सिंह उर्फ जयप्रकाश सिंह, लखन साव और अमन श्रीवास्तव को नामजद आरोपी बनाया था।

हालांकि अभियोजन पक्ष गणेश सिंह के खिलाफ अदालत में पर्याप्त साक्ष्य और गवाह पेश नहीं कर सका, जिसके बाद उसे बरी कर दिया गया। मामले में सरकार की ओर से एपीपी श्रद्धा जया टोपनो ने पक्ष रखा, जबकि बचाव पक्ष की ओर से झारखंड हाईकोर्ट के अधिवक्ता बीएन त्रिपाठी और रामगढ़ के अधिवक्ता महेंद्र महतो ने बहस की।

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