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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 6:22 · नई दिल्ली संस्करण

झारखंड बजटः राज्य पर कर्ज का बोझ घटा, वर्ष 2025-26 में स्थिर मूल्य पर 6.90 प्रतिशत विकास दर का अनुमान

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
झारखंड बजटः राज्य पर कर्ज का बोझ घटा, वर्ष 2025-26 में स्थिर मूल्य पर 6.90 प्रतिशत विकास दर का अनुमान

रांची। झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने मंगलवार को सदन में बजट पेश करने के बाद राज्य की आर्थिक स्थिति और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े प्रमुख आंकड़े साझा करते हुए दावा किया कि झारखंड लगातार संतुलित विकास और बेहतर वित्तीय अनुशासन की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने बताया कि राज्य की आर्थिक विकास दर बीते वर्षों में स्थिर और सशक्त बनी हुई है। वर्ष 2022-23 में विकास दर 7.2 प्रतिशत (स्थिर मूल्य) रही, जो 2023-24 में बढ़कर 7.5 प्रतिशत हो गई। वर्ष 2024-25 में यह 7.02 प्रतिशत रही, जबकि 2025-26 में इसके 7.72 प्रतिशत रहने का अनुमान है। आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 में विकास दर 2011-12 के स्थिर मूल्यों पर 6.90 प्रतिशत और वर्तमान मूल्यों पर 10.03 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है।

वित्त मंत्री ने कहा कि बेहतर वित्तीय प्रबंधन के कारण राज्य का ऋण बोझ भी नियंत्रित हुआ है। वर्ष 2021-22 में राज्य का ऋण-जीएसडीपी अनुपात 30.2 प्रतिशत था, जो 2022-23 में घटकर 28.4 प्रतिशत, 2023-24 में 27.7 प्रतिशत और 2024-25 में 25.3 प्रतिशत पर आ गया। वर्ष 2025-26 और 2026-27 में इसके लगभग 25 प्रतिशत के आसपास स्थिर रहने का अनुमान है।

उन्होंने इसे वित्तीय अनुशासन का परिणाम बताया। राज्य की अपनी राजस्व आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2019-20 में राज्य के स्रोतों से कुल राजस्व आय 25,521 करोड़ रुपए थी। यह बढ़कर 2024-25 में 42,732.70 करोड़ रुपए हो गई और 2026-27 में इसके 66,700 करोड़ रुपए तक पहुंचने का अनुमान है।

खर्च की संरचना में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। वर्ष 2019-20 में कुल व्यय में स्थापना और योजना व्यय का अनुपात 47:53 था, जो अब 2026-27 में बदलकर 36:64 प्रस्तावित है। यानी अब अधिक संसाधन विकास योजनाओं पर खर्च किए जा रहे हैं।

वित्त मंत्री ने बताया कि 2026-27 में पूंजीगत व्यय का आकलन 37,708.10 करोड़ रुपए किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 8.5 प्रतिशत अधिक है।

उनका कहना है कि इससे आधारभूत संरचना, सड़क, सिंचाई और अन्य विकास परियोजनाओं को गति मिलेगी। सरकार का दावा है कि संतुलित विकास दर, नियंत्रित ऋण स्तर और बढ़ती राजस्व आय झारखंड की अर्थव्यवस्था को स्थिर और सशक्त दिशा में आगे बढ़ा रही है।

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