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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 6:15 · नई दिल्ली संस्करण

ग्रामीण विकास विभाग टेंडर घोटाला : अधिशाषी अभियंता अजय कुमार ने किया अत्मसमर्पण, मिली जमानत

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
ग्रामीण विकास विभाग टेंडर घोटाला : अधिशाषी अभियंता अजय कुमार ने किया अत्मसमर्पण, मिली जमानत

रांची। झारखंड सरकार के ग्रामीण विकास विभाग में हुए बहुचर्चित टेंडर घोटाला मामले में आरोपित अधिशाषी अभियंता (एग्जीक्यूटिव इंजीनियर) अजय कुमार ने शुक्रवार को रांची स्थित पीएमएलए की विशेष अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण के बाद अदालत ने उन्हें सशर्त जमानत दे दी।विशेष अदालत ने अजय कुमार को एक लाख रुपये के निजी मुचलके पर जमानत देते हुए पासपोर्ट जमा करने और न्यायालय की अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ने का निर्देश दिया है। अदालत ने उनकी जमानत याचिका स्वीकार करते हुए मामले की अगली कानूनी प्रक्रिया जारी रखने की बात कही है।हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इस मामले में प्रमोद कुमार समेत 14 अन्य आरोपितों के खिलाफ पूरक आरोप पत्र दाखिल किया था। आरोप पत्र पर संज्ञान लेते हुए अदालत ने सभी आरोपितों के विरुद्ध समन जारी किया था। इसके बाद कई आरोपितों ने अदालत में आत्मसमर्पण किया और उन्हें जमानत भी मिल चुकी है।अजय कुमार वर्तमान में ग्रामीण विकास विभाग में अधिशाषी अभियंता के पद पर कार्यरत हैं। मामले को लेकर विभागीय और राजनीतिक हलकों में भी काफी चर्चा बनी हुई है।दरअसल, इस पूरे मामले की शुरुआत वर्ष 2019 में हुई थी, जब जमशेदपुर के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जांच के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को पता चला कि ग्रामीण कार्य विभाग में टेंडर आवंटन के बदले कमीशन लेने का एक संगठित नेटवर्क सक्रिय था। आरोप है कि प्रत्येक टेंडर पर करीब तीन प्रतिशत तक कमीशन लिया जाता था और इस राशि का बंटवारा ऊपर से नीचे तक तय व्यवस्था के तहत किया जाता था।ईडी की जांच में सामने आया कि यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था और विभागीय स्तर पर कई अधिकारियों एवं बिचौलियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई। जांच एजेंसी अब तक झारखंड, बिहार और दिल्ली समेत 52 ठिकानों पर छापेमारी कर चुकी है।इस कार्रवाई के दौरान पूर्व मंत्री आलमगीर आलम, उनके निजी सचिव तथा अन्य सहयोगियों समेत नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया था। जांच एजेंसी ने अब तक करीब 44 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की हैं, जबकि लगभग 38 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए हैं। इसके अलावा आठ लग्जरी वाहनों को भी जब्त किया गया है।ईडी फिलहाल मामले की वित्तीय लेनदेन, अधिकारियों की भूमिका और कमीशन नेटवर्क से जुड़े अन्य पहलुओं की गहन जांच कर रही है।

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