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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:34 · नई दिल्ली संस्करण

अलकतरा घोटाला: ठेकेदार को तीन साल की सजा, एक लाख रुपये का जुर्माना

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
अलकतरा घोटाला: ठेकेदार को तीन साल की सजा, एक लाख रुपये का जुर्माना

रांची। झारखंड के चर्चित अलकतरा (बिटुमेन) घोटाला मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए ठेकेदार झमन प्रसाद को तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी ठहराए गए ठेकेदार पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माने की राशि जमा नहीं करने की स्थिति में उसे छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।इस मामले में कुल सात आरोपितों के खिलाफ मुकदमा चलाया गया था। हालांकि सुनवाई के दौरान पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण तत्कालीन चार कनीय अभियंताओं और दो सहायक अभियंताओं को अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।सीबीआई की जांच के अनुसार, यह मामला वर्ष 2005-06 में भुरकुंडा-पतरातू सड़क खंड के लगभग छह किलोमीटर लंबे हिस्से के नवीकरण कार्य से संबंधित है। सड़क निर्माण में उपयोग होने वाले अलकतरे (बिटुमेन) की खरीद सरकारी एजेंसियों से की जानी थी, लेकिन निर्धारित नियमों की अनदेखी करते हुए इसकी खरीद निजी एजेंसियों से की गई।जांच एजेंसी के अनुसार, इस प्रक्रिया में वित्तीय अनियमितताएं बरती गईं और सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। मामले की जांच के दौरान लगभग 20.23 लाख रुपये के घोटाले का खुलासा हुआ था, जिसके बाद सीबीआई ने प्राथमिकी दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की थी।मुकदमे की सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से विशेष लोक अभियोजक सुशील कुमार ने अदालत में 14 गवाहों को पेश किया। गवाहों के बयान, दस्तावेजी साक्ष्य और अन्य उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर अदालत ने ठेकेदार झमन प्रसाद को दोषी पाया और उसे सजा सुनाई।अदालत ने माना कि मामले में प्रस्तुत साक्ष्य आरोपित की भूमिका को स्थापित करने के लिए पर्याप्त हैं, जबकि अन्य अभियंताओं के विरुद्ध आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध नहीं हो सके।मामले में ट्रायल का सामना करने वाले अन्य छह आरोपितों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया। इनमें तत्कालीन कनीय और सहायक अभियंता शामिल थे। बरी किए गए अभियुक्तों में भुनेश्वर महतो वर्तमान में पथ प्रमंडल, गोड्डा में कनीय अभियंता के पद पर कार्यरत हैं, जबकि अन्य अभियंता सेवानिवृत्त हो चुके हैं।

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