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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:48 · नई दिल्ली संस्करण

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 23 के मुकाबले झारखंड में 32 प्रतिशत बाल विवाह के मामले : उपायुक्‍त

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 23 के मुकाबले झारखंड में 32 प्रतिशत बाल विवाह के मामले : उपायुक्‍त

पलामू। सामाजिक कुरीति निवारण और बाल विवाह मुक्त झारखंड विषय पर शनिवार को अनुमंडल स्तरीय प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला का आयोजन शिवाजी मैदान में किया गया।कार्यशाला का उद्घाटन उपायुक्त समीरा एस, सदर अनुमंडल पदाधिकारी सलोचना मीणा, जेएसएलपीएस जिला कार्यक्रम प्रबंधक, एनडीसी, बीडीओ, डीएसपी, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी ने संयुक्त रूप से किया।जिला समाज कल्याण पदाधिकारी नीता चौहान ने बताया कि बाल विवाह उन्मूलन के लिए केंद्र सरकार की ओर से 100 दिवसीय जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। वर्ष 2024 में 12 और 2025 में 17 बाल विवाह को रोका गया है। किसी भी संदिग्ध स्थिति में टोल फ्री चाईल्ड हेल्पलाइन 1098, महिला हेल्पलाइन 181, पुलिस हेल्पलाइन 112 पर देने की अपील की गयी।उपायुक्त ने बाल विवाह से जुड़े डेटा को शेयर करते हुए कहा कि बाल विवाह अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर 23 प्रतिशत और झारखंड में 32 प्रतिशत है। उन्हाेंने कहा किझारखंड का स्तर राष्ट्रीय औसत से अधिक है। वहीं पलामू में 35 प्रतिशत बाल विवाह के मामले हैं। उपायुक्‍त ने कहा कि इस आंकड़े में कमी लाने के लिये हम सभी को कार्य करना होगा। 30 प्रतिशत लड़कियां एक स्तर के बाद स्कूल नहीं जा रही हैं। उन्होंने चैनपुर, लेस्लीगंज, रामगढ़, सतबरवा, हुसैनाबाद जैसे प्रखंड को चिन्हित कर कहा कि यहां पर बाल विवाह ज्यादा होता है। उन्‍होंने बताया कि‍ बाल विवाह करने पर दो साल के कारावास और एक लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान है।राज्य प्रतिनिधि शालिनी बोराल ने मिशन शक्ति, बाल विवाह, डायन कुप्रथा और राज्य सरकार की ओर से चलाई जा रही योजनाओं के बारे में जानकारी पीपीटी के माध्यम से दी गयी। कन्यादान योजना के अंतर्गत आर्थिक सहायता के रूप में 30 हजार रुपये की राशि दी जाती है।सदर एसडीओ सुलोचना मीणा ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम के आयोजन होने से हमारा भी ज्ञानवर्धन हो रहा है।मौके पर सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचल अधिकारी, प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, मुखिया, यूनिसेफ के रिसोर्स पर्सन सुमन कुमारी सहित अन्‍य उपस्थित थे।

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