मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
Rajasthan Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव का ऐलान, 4 चरणों में होगी वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूलमुंबई में CJP का प्रदर्शन पड़ा भारी! जेल भरो आंदोलन पर FIR, आयोजकों में हड़कंपज्ञानेश कुमार पर चले लोकतंत्र की हत्या का मुकदमा! प्रमोद तिवारी का बड़ा हमलाBJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी अब साइकिल पर सवार, समाजवादी पार्टी में हुए शामिलCM Yogi का बड़ा तोहफा: 4.60 लाख छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति, आपके खाते में आई क्या? चेक करेंNoida: सुपरनोवा की 43वीं मंजिल से युवक ने लगाई छलांग, मौके पर दर्दनाक मौत, सोसाइटी में हड़कंपमुंबई प्रदर्शन के बाद CJP का दिल्ली कूच का ऐलान, अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बातगठबंधन में फूट! रायबरेली से डरते थे राहुल गांधी! सपा नेता का बड़ा खुलासा, अखिलेश ने दी थी धमकी

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:54 · नई दिल्ली संस्करण

हेमंत सोरेन को हाई कोर्ट से बड़ी राहत, 2014 का आचार संहिता उल्लंघन मामला रद्द

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
हेमंत सोरेन को हाई कोर्ट से बड़ी राहत, 2014 का आचार संहिता उल्लंघन मामला रद्द

रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को झारखंड उच्च न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। उच्च न्यायालय ने सरायकेला-खरसावां जिले के आदित्यपुर थाना में वर्ष 2014 में दर्ज आचार संहिता उल्लंघन से संबंधित प्राथमिकी को निरस्त कर दिया है। अदालत के इस फैसले के साथ ही करीब एक दशक पुराने मामले का पटाक्षेप हो गया है।मामले की सुनवाई झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अनिल कुमार चौधरी की अदालत में हुई। मुख्यमंत्री की ओर से अधिवक्ता दीपांकर ने पक्ष रखा। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने प्राथमिकी संख्या 418/2014 को निरस्त करने का आदेश पारित किया।गौरतलब है कि इस मामले में उच्च न्यायालय पहले ही पश्चिम सिंहभूम की निचली अदालत में चल रही ट्रायल की कार्यवाही पर रोक लगा चुका था। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने और निचली अदालत में चल रही कार्यवाही को समाप्त करने की मांग को लेकर क्रिमिनल रिट याचिका दायर की थी।याचिका में कहा गया था कि वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव के दौरान वह अपनी पार्टी के प्रत्याशी के समर्थन में चुनाव प्रचार करने गए थे। उस दौरान उन्होंने किसी प्रकार की आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन नहीं किया था। इसके बावजूद उनके खिलाफ आचार संहिता उल्लंघन का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कर ली गई थी।याचिका में प्राथमिकी को तथ्यों और कानून के अनुरूप नहीं बताते हुए उसे निरस्त करने का आग्रह किया गया था।आदित्यपुर थाना में दर्ज प्राथमिकी में हेमंत सोरेन को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 188 (लोक सेवक द्वारा विधिवत आदेश की अवज्ञा), धारा 506 (आपराधिक धमकी) तथा जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपल एक्ट) की धारा 125 के तहत आरोपित बनाया गया था। इन आरोपों के आधार पर मामला न्यायिक प्रक्रिया में था और इसकी सुनवाई पश्चिम सिंहभूम की निचली अदालत में चल रही थी।सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री की ओर से यह तर्क दिया गया कि प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों का कोई ठोस आधार नहीं है और चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने किसी भी नियम या आचार संहिता का उल्लंघन नहीं किया था। मामले के सभी तथ्यों और कानूनी पहलुओं पर विचार करने के बाद उच्च न्यायालय ने प्राथमिकी को निरस्त करने का फैसला सुनाया।-

यह ख़बर दूसरों तक पहुँचाएँ

WhatsAppFacebookX

संबंधित ख़बरें