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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 4:27 · नई दिल्ली संस्करण

मैट्रिक छात्र हिरासत मामला: चतरा एसपी झारखंड हाई कोर्ट में पेश, 27 फरवरी को अगली सुनवाई

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
मैट्रिक छात्र हिरासत मामला: चतरा एसपी झारखंड हाई कोर्ट में पेश, 27 फरवरी को अगली सुनवाई

रांची। झारखंड उच्च न्यायालय में चतरा जिले के लावालौंग थाना क्षेत्र के एक 19 वर्षीय मैट्रिक छात्र को कथित रूप से 10 दिनों तक अवैध हिरासत में रखने के मामले में सोमवार को जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) सुमित अग्रवाल व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए। उन्होंने अदालत के समक्ष केस डायरी प्रस्तुत की। खंडपीठ ने अगली सुनवाई में भी एसपी को हाजिर रहने का निर्देश दिया है और विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।अदालत ने एसपी से पूछा है कि संबंधित थाना पुलिस ने छात्र को 10 दिनों तक हिरासत में क्यों रखा ? और उसे 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के समक्ष क्यों प्रस्तुत नहीं किया गया? साथ ही, जिम्मेदार पुलिस अधिकारी पर क्या कार्रवाई की गई तथा छात्र की मैट्रिक परीक्षा छूटने के लिए कौन जिम्मेदार है? इस पर भी जवाब तलब किया गया है। मामले की अगली सुनवाई 27 फरवरी को निर्धारित की गई है।मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति एके राय की खंडपीठ में हुई। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता भास्कर त्रिवेदी ने पक्ष रखा, जबकि राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता सचिन कुमार उपस्थित हुए।सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि पुलिस को आम जनता के बीच अपनी छवि सुधारने की जरूरत है। अदालत ने कहा कि पुलिस का दायित्व जनता को सुरक्षा देना है, न कि उन्हें प्रताड़ित करना। यदि छात्र को पूछताछ के बाद छोड़ दिया जाता, तो समाज में सकारात्मक संदेश जाता। अदालत ने यह भी कहा कि यदि वह दोषी होता तो उसे विधिसम्मत तरीके से मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत किया जा सकता था, लेकिन बिना कारण 10 दिन हिरासत में रखना कानून सम्मत नहीं है।खंडपीठ ने केस डायरी का अवलोकन करने के बाद पाया कि 31 जनवरी को छात्र के संबंध में उल्लेख है, लेकिन उससे पहले या बाद में हिरासत में लिए जाने का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। इस पर अदालत ने नाराजगी जताई। सुनवाई के दौरान चतरा एसपी के अलावा चतरा डीएसपी, लावालौंग और टंडवा थाना प्रभारी भी अदालत में उपस्थित थे।याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि रंगदारी के एक मामले में मोबाइल को संदिग्ध बताते हुए 26 जनवरी की रात लावालौंग थाना पुलिस छात्र को घर से उठाकर ले गई। पूछताछ के बाद उसे नहीं छोड़ा गया और टंडवा थाना पुलिस को सौंप दिया गया। आरोप है कि पुलिस ने 10 दिनों तक उसे अवैध रूप से हिरासत में रखा। जब इस संबंध में उच्च न्यायालय में हेबियस कॉर्पस याचिका दायर की गई, तब छात्र को घर पहुंचा दिया गया। हालांकि, याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मी घर के पास तैनात हैं और केस वापस लेने का दबाव बना रहे हैं।

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