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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:14 · नई दिल्ली संस्करण

उच्च न्यायालय ने सीओ से पूछा, कब्जा हटाने की बजाय निर्माण ध्वस्त क्यों किया

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
उच्च न्यायालय ने सीओ से पूछा, कब्जा हटाने की बजाय निर्माण ध्वस्त क्यों किया

रांची। महादेव उरांव की अवमानना याचिका पर शुक्रवार काे झारखंड उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई। मामले में अदालत के आदेश के आलोक में सर्किल ऑफिसर (सीओ), हेहल की ओर से सो कॉज दायर किया गया। उनकी ओर से अदालत को बताया गया कि हस्तक्षेपकर्ताओं को तीन बार नोटिस दिया गया था, लेकिन उन्होंने आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया। इसके बाद उनके स्ट्रक्चर (निर्माण) को तोड़ने की कार्रवाई शुरू हुई। इस पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि भूमि से कब्जा हटाने की बजाय आपने निर्माण ध्वस्त क्यों किया।कोर्ट ने प्रार्थी से पूछा है कि उन्होंने रिट याचिका दाखिल करते समय हस्तक्षेपकर्ताओं से एग्रीमेंट करने व उनसे पैसा लेने के तथ्यों को क्यों छुपाया। कोर्ट ने मामले में प्रार्थी से भी जवाब मांगा है। अदालत ने हस्ताक्षेपकर्ताओं (पीड़ितों) को पूर्व में दी गई अंतरिम राहत (उनके खिलाफ पीड़क कार्रवाई पर रोक) अगले आदेश तक के लिए बरकरार रखी है।उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति राजेश शंकर की अदालत ने मामले में हस्ताक्षेपकर्ताओं की हस्तक्षेप याचिका स्वीकार करते हुए उन्हें मामले में प्रतिवादी बनाया है और सीओ के सो कॉज पर अपना प्रति उत्तर देने को कहा है। अगली सुनवाई 8 मई को होगी। यह मामला सुखदेवनगर क्षेत्र में अतिक्रमण हटाए जाने से संबंधित है। हस्तक्षेपकर्ता की ओर से अधिवक्ता गौरव राज ने पक्ष रखा।उल्लेखनीय है कि रांची जिला प्रशासन ने खादगड़ा शिव दुर्गा मंदिर रोड स्थित मुंडारी प्रकृति की जमीन पर बने 12 घरों को तोड़ने का आदेश दिया है। इसके तहत बुलडोजर की कार्रवाई शुरू की गई थी, जिसका स्थानीय निवासी विरोध कर रहे थे।स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने प्रति कट्ठा 5.25 लाख रुपये के हिसाब से भुगतान कर जमीन खरीदी है और यहां घर बनाकर वर्षों से रह रहे हैं। लोगों का आरोप है कि 38.25 डिसमिल जमीन के लिए उन्होंने कुल भुगतान लगभग 1 करोड़ 8 लाख 93 हजार 750 रुपये किया गया था, लेकिन अब उन्हें बेदखल किया जा रहा है।

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