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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:26 · नई दिल्ली संस्करण

मुंडा-मानकी के नेतृत्व में उग्र आंदोलन, नौकरी की मांग को लेकर गुवा खदान जाम

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
मुंडा-मानकी के नेतृत्व में उग्र आंदोलन, नौकरी की मांग को लेकर गुवा खदान जाम

पश्चिमी सिंहभूम। पश्चिमी सिंहभूम जिले के गुवा क्षेत्र में रोजगार की मांग को लेकर ग्रामीणों ने सोमवार तड़के बड़ा आंदोलन शुरू कर दिया। करीब 12 गांवों के मुंडा-मानकी के बैनर तले सैकड़ों ग्रामीण सुबह लगभग 4 बजे से ही सड़कों पर उतर आए और खदान से जुड़े सभी प्रमुख मार्गों को जाम कर दिया।आंदोलनकारियों ने साइज स्क्रीन क्षेत्र, जीरो प्वाइंट और लोडिंग प्वाइंट जाने वाले रास्तों को पूरी तरह बंद कर दिया। इसके कारण खदान क्षेत्र में आवाजाही पूरी तरह रुक गई और पहली पाली में ड्यूटी पर जाने वाले मजदूरों की बसों को भी बीच रास्ते में रोकना पड़ा। दिनभर लौह अयस्क का उत्पादन और परिवहन बाधित रहा, जिससे कंपनी के कामकाज पर सीधा असर पड़ा।मौके पर मौजूद सीआईएसएफ और झारखंड पुलिस के जवानों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण अपनी मांगों को लेकर अडिग रहे। उनका आरोप है कि वर्षों से खदान में काम चल रहा है, लेकिन स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता नहीं दी जा रही है, जिससे क्षेत्र में बेरोजगारी और असंतोष बढ़ता जा रहा है।स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सेल प्रबंधन की टीम मौके पर पहुंची। एचआर महाप्रबंधक प्रवीण कुमार सिंह, डीजीएम (सीएसआर) अनिल कुमार और अधिकारी अमित तिर्की ने आंदोलनकारियों के साथ वार्ता की। प्रबंधन ने प्रस्ताव दिया कि हर महीने मुंडा-मानकी संघ के साथ बैठक कर प्रत्येक गांव से 2-3 लोगों को रोजगार दिया जाएगा, लेकिन ग्रामीणों ने इसे नाकाफी बताते हुए खारिज कर दिया।आंदोलनकारियों की मुख्य मांग है कि कम से कम 500 स्थानीय बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने का लिखित आश्वासन दिया जाए। उनका कहना है कि जब तक यह मांग पूरी नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।इस आंदोलन का नेतृत्व सारंडा पीढ़ के मानकी सुरेश चाम्पिया कर रहे हैं। उनके साथ मुंडा सींगा सुरीन, बिरसा सुरीन, मंगता सुरीन, लालू चाम्पिया, गोमाई चाम्पिया, सोमा चाम्पिया, जेना बाड़ींग, लांगो चाम्पिया, ननिका सुरीन, मसूरी सुरीन और सोमवारी सुरीन सहित कई ग्रामीण सक्रिय रूप से आंदोलन में शामिल हैं।ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा और खदान का कामकाज पूरी तरह लंबे समय के लिए ठप कर दिया जाएगा। फिलहाल क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है और प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

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