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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:15 · नई दिल्ली संस्करण

पूर्वी सिंहभूम में स्वर्णरेखा नदी के किनारे मिले सिलेंडर को सेना ने किया निष्क्रिय

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
पूर्वी सिंहभूम में स्वर्णरेखा नदी के किनारे मिले सिलेंडर को सेना ने किया निष्क्रिय

पूर्वी सिंहभूम। पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा प्रखंड अंतर्गत पानीपोड़ा गांव के पास स्वर्णरेखा नदी किनारे मिले एक खतरनाक सिलेंडर बम को सेना की बम निरोधक टीम ने बुधवार सुबह सफलतापूर्वक निष्क्रिय कर दिया।बम मिलने के बाद पूरे इलाके में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया था और सुरक्षा के मद्देनजर करीब एक किलोमीटर के दायरे को पूरी तरह सील कर दिया गया था। आम लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई थी, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।सेना की विशेषज्ञ टीम ने बेहद सावधानी और तकनीकी दक्षता के साथ ऑपरेशन को अंजाम दिया। बम को निष्क्रिय करने के लिए पहले लगभग 10 फीट गहरा गड्ढा खोदा गया, जिसमें बम को रखकर नियंत्रित विस्फोट किया गया। इस दौरान तेज धमाका हुआ और करीब 50 फीट तक धुएं का गुबार उठता देखा गया। राहत की बात यह रही कि पूरी प्रक्रिया नियंत्रित रही और किसी प्रकार की जान-माल की हानि नहीं हुई।दरअसल, यह संदिग्ध वस्तु 15 अप्रैल को उस समय सामने आई थी जब स्थानीय मछुआरे नदी में जाल डाल रहे थे। जाल में फंसी भारी वस्तु को जब किनारे लाया गया तो उसके स्वरूप को देखकर उन्हें शक हुआ। इसके बाद तत्काल पुलिस और प्रशासन को सूचना दी गई। जांच में यह खतरनाक सिलेंडर बम निकला, जिसके बाद सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई और सेना को बुलाया गया।इस संवेदनशील मिशन का नेतृत्व कैप्टन आयुष कुमार सिंह ने किया, जबकि पूरी कार्रवाई लेफ्टिनेंट कर्नल धर्मेंद्र सिंह के निर्देशन में संपन्न हुई। कलाइकुंडा एयरबेस से समन्वय स्थापित कर सेना ने सुरक्षित दूरी से डेटोनेटर के जरिए नियंत्रित विस्फोट कराया।मौके पर बहरागोड़ा थाना पुलिस भी तैनात रही। थाना प्रभारी शंकर प्रसाद कुशवाहा ने पुष्टि की कि बम को पूरी तरह निष्क्रिय कर दिया गया है और अब स्थिति सामान्य है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध वस्तु की सूचना तुरंत पुलिस को दें और उससे दूर रहें।गौरतलब है कि पानीपोड़ा और आसपास के क्षेत्रों में पिछले एक महीने के भीतर इस तरह की यह तीसरी घटना है। इससे पहले 17 मार्च और 24 मार्च को भी दो बम बरामद किए गए थे, जिन्हें 25 मार्च को सेना ने निष्क्रिय किया था। इनमें एक 227 किलोग्राम का अमेरिकी बम भी शामिल था, जिसे विशेषज्ञों ने द्वितीय विश्व युद्ध के समय का बताया था।विशेषज्ञों के अनुसार, चाकुलिया एयरपोर्ट का उपयोग द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सैन्य गतिविधियों के लिए किया जाता था। संभावना जताई जा रही है कि उसी समय ये विस्फोटक इस क्षेत्र में लाए गए या छोड़े गए होंगे। लगातार मिल रहे बमों के कारण स्थानीय लोगों में भय का माहौल बना हुआ है, हालांकि सेना और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई से हर बार स्थिति को नियंत्रित किया जा रहा है।

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