भारत में 320 किमी/घंटा की रफ्तार संभालने वाले बुलेट ट्रेन ड्राइवरों की सैलरी और योग्यता के बारे में जानें

भारत में मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर पर दौड़ने वाली बुलेट ट्रेन के चालकों (ड्राइवरों) की भूमिका सामान्य ट्रेनों के लोको पायलटों से बेहद अलग और तकनीकी रूप से उन्नत होगी। 320 किमी प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार से दौड़ने वाले इस हाई-स्पीड नेटवर्क के संचालन के लिए ड्राइवरों का चयन और उनका प्रशिक्षण बेहद कड़े मानदंडों के आधार पर किया जाएगा। बुलेट ट्रेन के ड्राइवरों (जिन्हें आमतौर पर 'ट्रेन पायलट' कहा जाता है) को सीधे सामान्य पदों से नहीं चुना जाता है, बल्कि इसके लिए एक त्रि-स्तरीय मार्ग अपनाया जाता है:
अनुभवी लोको पायलटों का चयन: नेशनल हाई-स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा भारतीय रेलवे के वरिष्ठ और अनुभवी मेल/एक्सप्रेस लोको पायलटों या आधुनिक मेट्रो/आरआरटीएस सिस्टम के कुशल चालकों को शॉर्टलिस्ट किया जाएगा, जिनके पास सुरक्षित ड्राइविंग का लंबा रिकॉर्ड हो। विशेषीकृत तकनीकी प्रशिक्षण: चुने गए पायलटों को अत्याधुनिक तकनीकों में पारंगत होने के लिए विशेष प्रशिक्षण से गुजरना होगा। इसके तहत उन्हें जापान या भारत में ही बने विशेष ट्रेनिंग सेंटर्स में भेजा जाता है।
सिम्युलेटर आधारित अभ्यास: वास्तविक ट्रेन चलाने से पहले ड्राइवरों को हाई-टेक ड्राइविंग सिम्युलेटर पर कड़ा अभ्यास कराया जाता है। इसमें आंधी-तूफान, भूकंप, आपातकालीन ब्रेक फेल होना या ट्रैक पर अचानक रुकावट जैसी आपातकालीन परिस्थितियों का सामना करने का कड़ा प्रशिक्षण दिया जाता है, ताकि वे हर सेकंड के हजारवें हिस्से में सही निर्णय ले सकें। पारंपरिक भारतीय ट्रेनों (मेल, एक्सप्रेस या मालगाड़ी) को चलाने वाले लोको पायलटों की तुलना में बुलेट ट्रेन के पायलटों का वेतनमान और भत्ते काफी अधिक होंगे।
सामान्य लोको पायलट की सैलरी: भारतीय रेलवे में सामान्य सीनियर मेल/एक्सप्रेस लोको पायलटों का मासिक वेतन (भत्तों को मिलाकर) अमूमन 60,000 रुपये से 90,000 रुपये के आसपास होता है। बुलेट ट्रेन पायलट की सैलरी: चूंकि हाई-स्पीड रेल का संचालन अत्यधिक सटीकता, उच्च श्रेणी की तकनीकी विशेषज्ञता और भारी मानसिक एकाग्रता की मांग करता है, इसलिए रिपोर्ट्स और कयासों के अनुसार इनका शुरुआती मासिक पैकेज 1 लाख रुपये से लेकर 3 लाख रुपये या उससे अधिक तक हो सकता है।
भारी वेतन के अलावा इन्हें स्पेशल रिस्क अलाउंस, नाइट ड्यूटी भत्ते, उच्च स्तर का मेडिकल इंश्योरेंस और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप अन्य सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। सामान्य लोको पायलटों का मुख्य फोकस सिग्नल, पटरियों की स्थिति और गति नियंत्रण पर होता है, जबकि बुलेट ट्रेन के पायलटों को पूरी तरह से ऑटोमेटेड और अत्याधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम के साथ तालमेल बिठाते हुए ट्रेन की रफ्तार और सुरक्षा संभालनी होती है। यही वजह है कि उनकी जिम्मेदारी और सैलरी दोनों ही पारंपरिक रेलवे चालकों की तुलना में कई गुना अधिक होती हैं।




