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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:14 · नई दिल्ली संस्करण

लॉकडाउन में पेड़ों की कटाई, जांच अधूरी रहने पर हाईकोर्ट की टिप्पणी

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
लॉकडाउन में पेड़ों की कटाई, जांच अधूरी रहने पर हाईकोर्ट की टिप्पणी

रांची। झारखंड में कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान विभिन्न जिलों में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कथित अवैध कटाई से जुड़े मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने जांच की धीमी प्रगति पर एक बार फिर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने राज्य सरकार से पूछा कि चार वर्ष बीत जाने के बावजूद जांच अब तक पूरी क्यों नहीं हो सकी और सीआईडी को सौंपी गई जांच आखिर किस चरण में है।

न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की खंडपीठ ने मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान यह भी सवाल उठाया कि सीआईडी की जांच फिलहाल केवल पलामू जिले के पांकी क्षेत्र तक ही सीमित क्यों दिखाई दे रही है, जबकि याचिका में राज्य के कई जिलों में पेड़ों की कटाई का आरोप लगाया गया है।

अदालत ने राज्य सरकार से इस संबंध में विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अभय कुमार मिश्रा ने अदालत को बताया कि मामला सामने आने के बाद सरकार ने जांच सीआईडी को सौंप दी थी, लेकिन जांच बेहद धीमी गति से चल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले में शामिल लोगों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। इस पर अदालत ने कथित ‘लार्जर कंस्पिरेसी’ के पहलू पर भी सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।

इससे पहले हुई सुनवाई में राज्य सरकार ने अदालत को बताया था कि जांच के दौरान वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका सामने आई है। सरकार ने यह भी स्वीकार किया था कि दो वन अधिकारियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है, जबकि एक अन्य आरोपी के विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है।

मामले में पलामू जिले में दर्ज दो प्राथमिकी की जांच सीआईडी कर रही है।

हाईकोर्ट पूर्व की सुनवाई में भी जांच में हो रही देरी पर कड़ा रुख अपना चुका है। अदालत ने कहा था कि इतने लंबे समय तक जांच लंबित रहना गंभीर मामला है और केवल दस्तावेजों की मांग का हवाला देकर देरी को उचित नहीं ठहराया जा सकता।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2020 के कोविड लॉकडाउन के दौरान जामताड़ा, पलामू, पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) और रांची सहित कई जिलों में सैकड़ों पेड़ों की अवैध कटाई की गई थी।

आरोप है कि कटे हुए पेड़ों को 200 से अधिक ट्रकों के माध्यम से बाहर भेजा गया। मामला सामने आने के बाद विभिन्न थानों में प्राथमिकी दर्ज हुई थी, जिसकी जांच अब भी सीआईडी के जिम्मे है।

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