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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 8:20 · नई दिल्ली संस्करण

हाईकोर्ट का भागे जोड़ों की सुरक्षा को लेकर आदेश

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
हाईकोर्ट का भागे जोड़ों की सुरक्षा को लेकर आदेश

-घर से भागे जोड़ों के लिए सेफ़ हाउस समेत सुरक्षा उपायों पर 2019 के शासनादेश को मानना ​​अधिकारियों का कर्तव्यप्रयागराज। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने परिवार की मर्ज़ी के ख़िलाफ़ शादी करने वाले जोड़ों की जान और आज़ादी की रक्षा करने की राज्य की ज़िम्मेदारी को एक बार फिर दोहराया है। कोर्ट ने यूपी सरकार के 2019 के ऑर्डर का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया है, जिसमें ऐसे जोड़ों के लिए ज़रूरी बचाव और सुधार के उपाय बताए गए हैं।सामिया व अन्य की याचिका पर एक जोड़े की सुरक्षा का निपटारा करते हुए जस्टिस गरिमा प्रसाद की बेंच ने कहा कि पुलिस अधिकारी हर मामले में खतरे का अंदाज़ा लगाने और स्थिति की गंभीरता के आधार पर सुरक्षित रहने की जगह और सुरक्षा सहित ज़रूरी सुरक्षा देने के लिए ज़िम्मेदार हैं।मामले के अनुसार एक बालिग जोड़े ने हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया और राज्य सरकार को महिला के पिता द्वारा पैदा की गई "गैर-कानूनी रुकावट" से उनकी जान और आज़ादी की रक्षा करने के निर्देश देने की मांग की। उनका कहना था कि उम्र के अंतर और इस डर की वजह से कि इस आदमी की पहली शादी नहीं है, महिला का पिता उन्हें लगातार परेशान कर रहा था और धमका रहा था, जिससे उनकी शांतिपूर्ण शादीशुदा ज़िंदगी में खलल पड़ा और उनकी जान और आज़ादी को खतरा पैदा हो गया। हालांकि, बेंच ने कहा कि पिछले साल नवंबर में हाईकोर्ट द्वारा दी गई अंतरिम सुरक्षा के बाद महिला के पिता से याचीगण की जान को अब कोई खतरा नहीं है। हालांकि, पति की शादीशुदा स्थिति के बारे में असल विवाद को सुलझाते हुए राज्य सरकार की तरफ़ से कोर्ट को बताया गया कि यह याचीगण की पहली शादी है।इसे देखते हुए रिट याचिका का निपटारा कर दिया गया। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि अगर याचिकाकर्ताओं की जान और आज़ादी को कोई असली और गंभीर खतरा महसूस होता है तो वे पुलिस अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों की यह ज़िम्मेदारी होगी कि वे ऐसे खतरे का अंदाज़ा लगाएं और सही सुरक्षा दें। यह पक्का करते हुए कि याचिकाकर्ताओं को कोई परेशानी न हो, 2019 के शासनादेश और शक्ति वाहिनी बनाम भारत संघ (सुप्रा) में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक आगे कार्यवाही की जाय।कोर्ट ने कहा कि बड़ी संख्या में युवा जोड़े अपनी जान और आज़ादी की सुरक्षा के लिए हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटा रहे हैं, इसे देखते हुए कोर्ट ने शक्ति वाहिनी बनाम भारत संघ में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर ध्यान देने के बाद राज्य के अधिकारियों को एक असरदार सिस्टम बनाने और ज़िला लेवल पर ऐसे मामलों को सुलझाने के लिए गाइडलाइन बनाने का निर्देश दिया। इन निर्देशों के मुताबिक, राज्य सरकार ने 31 अगस्त, 2019 को एक शासनादेश जारी किया, जिसमें शादी या किसी भी सहमति से बने रिश्ते से पैदा होने वाले खतरों का सामना कर रहे जोड़ों की सुरक्षा के लिए ज़रूरी रोकथाम, सुधार और सज़ा के उपाय बताए गए।शासनादेश में कहा गया है कि खाप पंचायतों या इज़्ज़त से जुड़ी धमकियों से जुड़े मामलों को गंभीर मामला माना जाएगा। परिवार के विरोध के दूसरे मामलों में, अधिकारियों की ज़िम्मेदारी है कि वे जोखिम का अंदाज़ा लगाएँ और सही राहत दें। इन निर्देशों का पालन न करने पर हाईकोर्ट ने कहा कि विभागीय कार्यवाही कर सज़ा दी जाएगी। कोर्ट ने कहा 2019 के शासनादेश में दिए गए निर्देश सभी सम्बंधित अधिकारियों के लिए ज़रूरी है और उनका सख्ती से पालन किया जाएगा।

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