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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:25 · नई दिल्ली संस्करण

केंद्रीय चुनाव आयोग ने मंजूनाथ भजंत्री को रांची उपायुक्त बनाये जाने पर जताया कड़ा एतराज, 15 दिनों में मांगी कार्रवाई रिपोर्ट

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन

रांची। केंद्रीय चुनाव आयोग ने मंजूनाथ भजंत्री को रांची डीसी बनाये जाने पर राज्य के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर कड़ा एतराज जताते हुए इसे झारखंड हाई कोर्ट के आदेश का उल्लंघन बताया है। आयोग ने मुख्य सचिव को हाई कोर्ट के छह दिसंबर, 2021 के आदेश का अनुपालन करने का कहा है, जिसमें उसने देवघर के तत्कालीन डीसी मंजूनाथ भजंत्री को पद से हटाने, विभागीय कार्यवाही करने और आयोग की अनुमति के बिना चुनाव कार्य से जुड़े पद पर पदस्थापित नहीं करने का आदेश दिया था। साथ ही आयोग ने मुख्य सचिव को 15 दिनों में कार्रवाई रिपोर्ट आयोग को भेजने का आदेश दिया है।चुनाव आयोग ने अपने पत्र में लिखा है कि मधुपुर उपचुनाव में तत्कालीन डीसी ने आयोग के वोटर टर्न आउट एप और प्रेस कांफ्रेंस में अलग-अलग आंकड़ा पेश करने की वजह से उन्हें 26 अप्रैल, 2021 को उपायुक्त के पद से हटा दिया गया था लेकिन आचार संहिता समाप्त होने के बाद सरकार ने उन्हें फिर से देवघर डीसी के पद पर पदस्थापित करने का आदेश दिया था। इसके करीब छह माह बाद मुख्य निर्वाची अधिकारी (सीइओ) ने आयोग को रिपोर्ट भेजी थी।इस रिपोर्ट में सीईओ ने बताया कि डीसी ने आचार संहिता खत्म होने के बाद आचार संहिता उल्लंघन के आरोप में सांसद निशिकांत दूबे के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। चुनाव आयोग ने सीइओ की रिपोर्ट पर डीसी से स्पष्टीकरण मांगा था लेकिन उन्होंने संतोषप्रद जवाब नहीं मिलने के बाद छह दिसंबर, 2021 को आयोग ने उपायुक्त को हटाने और भविष्य में आयोग की अनुमति के बिना चुनाव से जुड़े काम में पदस्थापित नहीं करने का आदेश दिया था लेकिन फिर भी सरकार ने उन्हें पद से नहीं हटाया।चुनाव आयोग ने पत्र में लिखा है कि 23 दिसंबर, 2021 को कार्मिक विभाग की ओर से आयोग को एक पत्र लिखा गया। इसमें कहा गया कि आयोग अपना आदेश वापस ले। क्योंकि, आचार संहिता समाप्त होने के बाद इस तरह का आदेश देने का अधिकार आयोग को नहीं है। इस तरह के आदेश से राज्य की संप्रभुता प्रभावित होती है। इसके बाद आयोग ने 15 दिसंबर, 2022 को पत्र भेज कर इस मामले में मुख्य सचिव की राय मांगी लेकिन उन्होंने अपनी राय नहीं दी। इसके बाद 26 दिसंबर, 2022 को मंजूनाथ भजंत्री से जिला निर्वाचन पदाधिकारी का काम वापस ले लिया गया था और उसे डीडीसी को सौंप दिया।उल्लेखनीय है कि मधुपुर उपचुनाव में तत्कालीन डीसी ने आयोग के वोटर टर्न आउट एप और प्रेस कांफ्रेंस में अलग-अलग आंकड़ा पेश करने को लेकर चुनाव आयोग ने छह दिसंबर, 2021 को मंजूनाथ भजंत्री को उपायुक्त के पद से हटाने का आदेश दिया था। मंजूनाथ भजंत्री ने आयोग के आदेश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका (5716/22) दायर की थी। मंजूनाथ भजंत्री ने याचिका में चुनाव आयोग के आदेश को नियम के विरुद्ध बताया था। सिंगल बेंच ने भजंत्री की याचिका को स्वीकार कर ली। इसके बाद आयोग ने सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में एलपीए (244/24) दायर की।हाई कोर्ट ने सुनवाई के बाद 30 सितंबर को फैसला सुनाया और चुनाव आयोग के आदेश को सही करार दिया। न्यायालय ने आदेश में कहा था कि आयोग का आदेश नहीं मानना संविधान के मूल ढांचे पर प्रहार करने जैसा है। उसका निर्देश मानना राज्य के लिए बाध्यकारी है।

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