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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 8:36 · नई दिल्ली संस्करण

नोएडा में कंस्ट्रक्शन साइट पर इंजीनियर की मौत के मामले में दो बिल्डर कंपनियों पर एफआईआर

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
नोएडा में कंस्ट्रक्शन साइट पर इंजीनियर की मौत के मामले में दो बिल्डर कंपनियों पर एफआईआर

नोएडा। नोएडा के सेक्टर-150 में बिल्डर साइट पर एक इंजीनियर की मौत के मामले ने नोएडा प्राधिकरण और नामजद बिल्डर कंपनियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस मामले में दो बिल्डर कंपनियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

जानकारी के अनुसार उन पर नोएडा प्राधिकरण का करीब 3000 करोड़ रुपए का बकाया है। हैरानी की बात यह है कि इतना बड़ा बकाया होने के बावजूद प्राधिकरण न तो अपनी राशि वसूल कर पाया और न ही निर्माण स्थल पर न्यूनतम सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित करा सका।

सेक्टर-150 में जिस साइट पर हादसा हुआ, वहां सुरक्षा मानकों की खुलेआम अनदेखी की जा रही थी। मौके पर न तो सेफ्टी बेरिकेट्स लगाए गए थे और न ही चेतावनी संकेतक मौजूद थे।

इसी लापरवाही के चलते एक इंजीनियर की जान चली गई। घटना के बाद प्राधिकरण और बिल्डर की मिलीभगत को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

7 जुलाई 2014 को लोटस ग्रीन बिल्डर को स्पोर्ट्स सिटी परियोजना के नाम पर इस जमीन का अलॉटमेंट किया गया था। नियमों के तहत इस जमीन का उपयोग खेल और उससे जुड़े बुनियादी ढांचे के विकास के लिए किया जाना था, लेकिन आरोप है कि बिल्डर कंपनी ने नियमों को ताक पर रखकर इस जमीन को अलग-अलग लोगों और संस्थाओं को बेच दिया।

इससे न सिर्फ सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचा, बल्कि परियोजना का मूल उद्देश्य भी समाप्त हो गया।

इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी जांच कर रहे हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि स्पोर्ट्स सिटी के नाम पर अलॉट की गई जमीन की बिक्री कैसे हुई और इसमें किन-किन अधिकारियों व बिल्डर कंपनियों की भूमिका रही।

सबसे बड़ा सवाल नोएडा प्राधिकरण की भूमिका पर उठ रहा है। जिस प्राधिकरण से अपने हजारों करोड़ रुपए का बकाया तक नहीं वसूला गया, वही प्राधिकरण साइट पर काम कर रहे लोगों की सुरक्षा के लिए जरूरी उपकरण और इंतजाम भी नहीं करा सका। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते बकाया वसूली और सख्त निगरानी की जाती, तो शायद यह हादसा टल सकता था।

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