कच्चे तेल के बढ़ते संकट के बीच भारत का बड़ा कदम: इथेनॉल उत्पादन बढ़ने से फ्लेक्सी-फ्यूल गाड़ियों को मिलेगा बढ़ावा
सरकार फ्लेक्सी-फ्यूल वाहनों की मदद से मौजूदा ई20 के लेवल से ज्यादा इथेनॉल ब्लेंडिंग की इजाजत देने की तैयारी कर रही है। पीएम मोदी के सलाहकार तरुण कपूर ने बुधवार को इसकी जानकारी दी।

सरकार फ्लेक्सी-फ्यूल वाहनों की मदद से मौजूदा ई20 के लेवल से ज्यादा इथेनॉल ब्लेंडिंग की इजाजत देने की तैयारी कर रही है। पीएम मोदी के सलाहकार तरुण कपूर ने बुधवार को इसकी जानकारी दी। सरकार का मानना है कि अब देश में इथेनॉल का उत्पादन हमारी मौजूदा जरूरतों से ज्यादा होने लगा है इसलिए अब ई20 की सीमा को पार कर आगे बढ़ने का सही समय आ गया है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक तरूण कपूर ने कहा कि ई20 प्रोग्राम अब तक बहुत सफल रहा है और कई ऑटोमोबाइल कंपनियों ने जल्द ही फ्लेक्सी-फ्यूल गाड़ियां लॉन्च करने के अपने प्लान का जिक्र किया है। उन्होंने कहा कि अब हमारा फोकस फ्लेक्सी-फ्यूल वाहनों को लाने और ई20 से ज्यादा परसेंट तक ब्लेंडिंग की अनुमति देने पर है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे वाहनों के आने के साथ-साथ फ्यूल आउटलेट्स पर शुद्ध इथेनॉल की उपलब्धता भी बढ़ानी होगी।
उन्होंने आगे यह भी कहा कि पश्चिम एशिया संकट के बीच बायोफ्यूल को बढ़ावा देना और भी जरूरी हो गया है। इस संकट ने सप्लाई को बाधित किया है और कच्चे तेल की कीमतों को करीब 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा दिया है, साथ ही इनके और बढ़ने की आशंका भी है। भारत अपनी जरूरत का करीब 80फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है इसलिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी भारत के लिए चिंताजनक है क्योंकि इससे इम्पोर्ट में खर्च ज्यादा आएगा, डॉलर ज्यादा खर्च होंगे और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ेगा।
अब जब इस बीच देश में चीनी और मक्के से बनने वाले इथेनॉल की उत्पादन क्षमता बढ़ी ही है, तो इस अतिरिक्त इथेनॉल का इस्तेमाल क्यों न किया जाए। इसे खपाने का सबसे बेहतरीन जरिया फ्लेक्सी-फ्यूल गाड़ियां हैं। अभी सड़कों पर चल रही साधारण गाड़ियां अधिकतम ई20 तक का ही ईंधन झेल सकती हैं। इससे ज्यादा इथेनॉल डालने पर उनके इंजन के पार्ट्स खराब हो सकते हैं। इसके विपरीत, फ्लेक्सी-फ्यूल वाहन में ऐसे इंजन लगे होते हैं, जो 20फीसदी से लेकर 85फीसदी या 100 फीसदी शुद्ध इथेनॉल तक के मिश्रण पर आसानी से चल सकते हैं।
इनमें लगे सेंसर खुद-ब-खुद ईंधन में इथेनॉल की मात्रा को पहचान कर इंजन की परफॉर्मेंस को एडजस्ट कर लेते हैं। ई20 ब्लेंडिंग को लेकर हाल ही में हुई आलोचना पर कपूर ने कहा कि इसमें से ज्यादातर या तो गलत जानकारी थी या किसी खास मकसद से इसकी आलोचना की गई। उन्होंने कहा कि स्टडीज से पता चला है कि ई20 अच्छा काम करता है और फ्यूल एफिशिएंसी में थोड़ी-बहुत कमी की भरपाई इसके ज्यादा ऑक्टेन कंटेंट से हो जाती है।




