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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 8:28 · नई दिल्ली संस्करण

ध्यान आंतरिक परिवर्तन की शुरुआत, बेहतर सोच से बेहतर बनेगी दुनिया: उपराष्ट्रपति

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
ध्यान आंतरिक परिवर्तन की शुरुआत, बेहतर सोच से बेहतर बनेगी दुनिया: उपराष्ट्रपति

नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि ध्यान (मेडिटेशन) आंतरिक परिवर्तन की शुरुआत है और सकारात्मक सोच के माध्यम से ही एक बेहतर दुनिया का निर्माण किया जा सकता है। ध्यान व्यक्ति को मानसिक शांति, स्पष्टता और सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान करता है। नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में रविवार को आयोजित ‘ग्लोबल कॉन्फ्रेंस ऑफ मेडिटेशन लीडर्स-मेडिटेशन फॉर होलिस्टिक लिविंग एंड ए पीसफुल वर्ल्ड’ को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने ये बातें कही।पिरामिड स्पिरिचुअल सोसाइटीज मूवमेंट और बुद्धा-सीईओ क्वांटम फाउंडेशन की ओर से आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि ध्यान मनुष्य के भीतर एक दीपक जलाने जैसा है, जो अज्ञानता को समाप्त कर व्यक्ति को सत्य और शांति के मार्ग पर ले जाता है। उन्होंने तमिल संत तिरुमूलर की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि मानव शरीर एक मंदिर के समान है और ध्यान के माध्यम से व्यक्ति अपने भीतर स्थित दिव्यता को पहचान सकता है।उन्होंने वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज दुनिया कई प्रकार की चुनौतियों का सामना कर रही है। संघर्ष केवल बाहरी नहीं बल्कि व्यक्ति के भीतर भी चलता रहता है। ऐसे समय में ध्यान शांति और संतुलन स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह तनाव को कम करता है, एकाग्रता को बढ़ाता है और भावनात्मक संतुलन को मजबूत बनाता है।उपराष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि ध्यान केवल आध्यात्मिक साधकों के लिए ही नहीं, बल्कि हर व्यक्ति के लिए उपयोगी है। यह सामान्य व्यक्ति को भी उच्च चेतना की ओर ले जाने में सहायक है। उन्होंने कहा कि भौतिक सफलता की अंधाधुंध दौड़ में जीवन के मूल्यों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और ध्यान इस संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है।‘विकसित भारत-2047’ के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश के आर्थिक विकास के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य को भी प्राथमिकता देना आवश्यक है। इस दिशा में ध्यान एक प्रभावी माध्यम साबित हो सकता है।युवाओं को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि ध्यान नशा मुक्ति का एक सशक्त साधन बन सकता है। यह तनाव, चिंता और दिशाहीनता को दूर कर युवाओं को सही मार्ग पर ले जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि बिना मूल्यांकन के अवलोकन करना ही उच्चतम बुद्धिमत्ता है और ध्यान व्यक्ति को यह क्षमता प्रदान करता है।कार्यक्रम में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के पूर्व महानिदेशक डीआर कार्तिकेयन, परमार्थ निकेतन आश्रम ऋषिकेश के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती, क्वांटम लाइफ यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष डॉ. न्यूटन कोंडावेटी, बुद्धा-सीईओ क्वांटम फाउंडेशन के संस्थापक चंद्र पुलामारसेट्टी और पिरामिड स्पिरिचुअल ट्रस्ट के अध्यक्ष विजय भास्कर रेड्डी सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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