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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 6:19 · नई दिल्ली संस्करण

हरी सब्ज़ियों के बढ़े दामों से उपभोक्ता परेशान

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
हरी सब्ज़ियों के बढ़े दामों से उपभोक्ता परेशान

पूर्वी सिंहभूम। शहर में हरी सब्जियों के बढ़ते दाम ने आम उपभोक्ताओं की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। लगातार कई सप्ताह से सब्जियों की कीमतें सामान्य स्तर से काफी अधिक बनी हुई हैं। इसका मुख्य कारण बाजार में आवक कम और खपत अधिक होना बताया जा रहा है। हालांकि राहत की खबर यह है कि अब स्थिति में धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिल रहे हैं और उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में दाम सामान्य हो जाएंगे।शुक्रवार को साकची बाजार के थोक विक्रेता गणेश साहू ने बताया कि पिछले दिनों लगातार बारिश के कारण खेतों में फसल की पैदावार प्रभावित हुई थी। दूसरी ओर शहर में सब्जियों की मांग अधिक होने से कीमतों में उछाल देखने को मिला। उन्होंने कहा कि “अब बरसात का मौसम समाप्त हो चुका है। खेतों में फिर से पैदावार बढ़ रही है और विभिन्न इलाकों से मार्केट में आवक शुरू हो गई है। अगले कुछ हफ्तों में सब्जियों के मूल्य सामान्य हो जाने की संभावना है।उपभोक्ता संतोष कुमार पांडे ने सब्जियों के दामों को लेकर नाराज़गी जताई। उन्होंने कहा कि बाजार में सब्जी खरीदना किसी विलासिता से कम नहीं लग रहा। गाजर 40 किलो, बैंगन 60 से 80 किलो, और फूलगोभी 60- 80 किलो और टमाटर 70 रुपये , शिमला मिर्च एक सौ रुपये किलो में मिल रहा है। आलू-प्याज़ के भाव भी बढ़े हैं। पहले जितनी सब्जी खरीदते थे, अब उसकी आधी मात्रा लानी पड़ती है। उन्होंने सरकार और प्रशासन से बाजार नियंत्रण की मांग की।वहीं उपभोक्ता सुरेश राम ने बताया कि भिंडी 100 किलो मिल रही है। “मटर तो आ गया है, लेकिन ₹50 पाव यानी 200 किलो के भाव पर यह आम आदमी की पहुंच से बाहर है। पलक और सरसों का साग भी 40 किलो से कम नहीं। जो सामान इस मौसम में आमतौर पर 15-20 किलो मिलता था, अब उसका दाम लगभग दोगुना हो गया है। ऐसे में मजबूरी में कम मात्रा में ही सब्ज़ी खरीदनी पड़ रही है।दुकानदारों का कहना है कि फिलहाल हर तरह की सब्जियों के दाम ऊँचे बने हुए हैं लेकिन जैसे-जैसे आवक बढ़ेगी, बाजार में स्थिरता आएगी और मूल्य घट जाएंगे। शहरवासियों को भी इसी सुधार की प्रतीक्षा है।ग्राहकों का कहना है कि महंगाई के बीच जितनी कमाई है, उसी के हिसाब से उन्हें खरीदारी में कटौती करनी पड़ रही है। सबकी उम्मीदें अब नई फसलों पर टिकी हैं, ताकि फिर से उनकी रसोई में हरी सब्जियों की खुशबू और रंगत लौट सके।

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