मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
Rajasthan Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव का ऐलान, 4 चरणों में होगी वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूलमुंबई में CJP का प्रदर्शन पड़ा भारी! जेल भरो आंदोलन पर FIR, आयोजकों में हड़कंपज्ञानेश कुमार पर चले लोकतंत्र की हत्या का मुकदमा! प्रमोद तिवारी का बड़ा हमलाBJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी अब साइकिल पर सवार, समाजवादी पार्टी में हुए शामिलCM Yogi का बड़ा तोहफा: 4.60 लाख छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति, आपके खाते में आई क्या? चेक करेंNoida: सुपरनोवा की 43वीं मंजिल से युवक ने लगाई छलांग, मौके पर दर्दनाक मौत, सोसाइटी में हड़कंपमुंबई प्रदर्शन के बाद CJP का दिल्ली कूच का ऐलान, अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बातगठबंधन में फूट! रायबरेली से डरते थे राहुल गांधी! सपा नेता का बड़ा खुलासा, अखिलेश ने दी थी धमकी

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:21 · नई दिल्ली संस्करण

उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ छठ महापर्व संपन्न

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ छठ महापर्व संपन्न

रांची। राजधानी रांची के सभी छठ घाटों में लोक आस्था का महापर्व छठ उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ संपन्न हुआ। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को व्रतियों ने सुबह 06 बजकर 32 मिनट पर उदीयमान सूर्यदेव को अर्घ्य दिया और धन, धान्य और आरोग्य की कामना की। अर्घ्य देने के बाद व्रतियों ने पारण कर निर्जला उपवास को पूरा किया।पंडित मनोज पांडेय ने शुक्रवार को कहा कि सूर्य षष्ठी का व्रत आरोग्य की प्राप्ति, सौभाग्य और संतान के लिए रखा जाता है। स्कंद पुराण के अनुसार राजा प्रियव्रत ने भी छठ व्रत रखा था। उन्हें कुष्ट रोग हो गया था। इस रोग से मुक्ति के लिए भगवान भास्कर ने भी छठ व्रत किया था। स्कंद पुराण में प्रतिहार षष्ठी के तौर पर इस व्रत की चर्चा है। वर्षकृत्यम में भी छठ की महत्ता की चर्चा है।उल्लेखनीय है कि आस्था का महापर्व साल में दो बार चैत्र और कार्तिक माह में मनाया जाता है। छठ महापर्व की शुरुआत कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को नहाय-खाय के साथ हुई थी। इस दिन व्रतियों ने अरवा चावल, चना का दाल और कद्दु का सब्जी खाया था। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि यानी 6 नवंबर को खरना था। इस दिन रात में व्रतियों ने खीर का प्रसाद ग्रहण किया था। इसके बाद व्रतियों का 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू हुआ था। पंचमी तिथि को व्रतियों ने अस्तचलागामी सूर्य को अर्घ्य दिया था जबकि शुक्रवार को छठ के चौथे दिन अरुणोदय काल में भगवान भास्कर को अर्घ्य दिया गया। व्रतियों के पारण के साथ चार दिनों तक चलने वाला छठ महापर्व संपन्न हुआ।

यह ख़बर दूसरों तक पहुँचाएँ

WhatsAppFacebookX

संबंधित ख़बरें