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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 8:37 · नई दिल्ली संस्करण

गांव हों या शहर, भीषण गर्मी में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करें : सीएम योगी

राष्ट्रीय सागर डेस्क5 मिनट का पठन
गांव हों या शहर, भीषण गर्मी में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करें : सीएम योगी

लखनऊ : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भीषण गर्मी और बढ़ती बिजली मांग के बीच प्रदेश में निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आमजन, किसानों, व्यापारियों और उद्योगों को बिजली संकट का सामना न करना पड़े, इसके लिए सभी स्तरों पर सतत मॉनिटरिंग की जाए।

उन्होंने कहा कि गर्मी के इस चुनौतीपूर्ण दौर में ऊर्जा विभाग पूरी संवेदनशीलता और तत्परता के साथ कार्य करे।

मुख्यमंत्री रविवार को ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा एवं राज्य मंत्री कैलाश सिंह राजपूत की उपस्थिति में ऊर्जा विभाग, पावर कॉरपोरेशन एवं सभी डिस्कॉम के अधिकारियों के साथ विद्युत आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने राज्य की विद्युत उत्पादन क्षमता को और सुदृढ़ बनाने तथा गर्मी के मौसम में निर्बाध बिजली उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बढ़ती विद्युत मांग को देखते हुए उत्पादन इकाइयों की अधिकतम क्षमता का उपयोग किया जाए और सभी संयंत्रों में तकनीकी दक्षता तथा रखरखाव व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

बैठक में बताया गया कि उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड की कुल विद्युत उत्पादन क्षमता बढ़कर 13,388 मेगावाट हो गई है। इसमें अनपरा, ओबरा, हरदुआगंज, परीछा, जवाहरपुर और पनकी जैसे तापीय विद्युत गृहों की 9,120 मेगावाट क्षमता शामिल है, जबकि जल विद्युत परियोजनाओं से 526.4 मेगावाट क्षमता उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त मेजा, घाटमपुर और खुर्जा परियोजनाओं से संयुक्त उपक्रमों के माध्यम से 3,742 मेगावाट क्षमता राज्य को प्राप्त हो रही है।

बैठक में बताया गया कि वर्ष 2022 की तुलना में वर्ष 2026 तक उत्पादन निगम की स्थापित क्षमता में 86 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है। इसके अतिरिक्त, गैर पारंपरिक ऊर्जा विकल्पों से लगभग 10 हजार मेगावॉट बिजली उत्पादन हो रहा है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश की बढ़ती विद्युत मांग को देखते हुए ट्रांसमिशन नेटवर्क को और अधिक मजबूत, आधुनिक एवं भरोसेमंद बनाने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि बिजली आपूर्ति व्यवस्था की मजबूती के लिए ट्रांसमिशन प्रणाली की दक्षता अत्यंत महत्वपूर्ण है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गर्मी के मौसम में किसी भी प्रकार की तकनीकी बाधा को न्यूनतम रखा जाए तथा ट्रांसमिशन नेटवर्क की सतत मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। बैठक में बताया गया कि उत्तर प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड के पास वर्तमान में 60,858 सर्किट किलोमीटर लंबी ट्रांसमिशन लाइनें संचालित हैं। प्रदेश में 715 उपकेंद्रों के माध्यम से 2,05,632 एमवीए क्षमता उपलब्ध है। ट्रांसमिशन नेटवर्क की उपलब्धता 99.30 प्रतिशत दर्ज की गई है, जबकि पारेषण हानियां घटकर 3.2 प्रतिशत रह गई हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में बिजली वितरण व्यवस्था को और अधिक जवाबदेह तथा उपभोक्ता केंद्रित बनाया जाए।

उन्होंने फीडर वाइज जवाबदेही तय करने के निर्देश देते हुए कहा कि ट्रांसफॉर्मर खराब होने, फीडर बाधित होने अथवा शिकायत निस्तारण में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि आंधी-तूफान और अत्यधिक तापमान जैसी परिस्थितियों के बावजूद फील्ड स्तर पर त्वरित रिस्पॉन्स सिस्टम सक्रिय रखा जाए।

बैठक में बताया गया कि 4, 7 और 15 मई को आए आंधी-तूफान के कारण प्रदेश में 38 सब-स्टेशन और 326 फीडर प्रभावित हुए, लेकिन मरम्मत एवं बहाली कार्य तेजी से कराया गया। मुख्यमंत्री ने भूमिगत केबल वाले स्थलों पर खुदाई से पूर्व सक्षम प्राधिकारी से विधिवत स्वीकृति सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए ताकि विद्युत व्यवस्था बाधित न हो। मुख्यमंत्री ने ट्रांसफॉर्मर क्षति की घटनाओं में कमी को सकारात्मक बताते हुए इसे और बेहतर करने के निर्देश दिए।

बैठक में बताया गया कि वर्ष 2022-23 की तुलना में पावर ट्रांसफॉर्मर क्षति में लगभग 80 प्रतिशत की कमी आई है। वर्ष 2022-23 में 429 पावर ट्रांसफॉर्मर क्षतिग्रस्त हुए थे, जबकि वर्ष 2025-26 में यह संख्या घटकर 87 रह गई। बैठक में यह भी बताया गया कि 100 केवीए से अधिक क्षमता वाले वितरण ट्रांसफॉर्मरों की क्षति दर में भी उल्लेखनीय कमी आई है। वर्ष 2022-23 में जहां 39,177 बड़े ट्रांसफॉर्मर क्षतिग्रस्त हुए थे, वहीं वर्ष 2025-26 में यह संख्या घटकर 20,292 रह गई। अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा तंत्र की व्यापक स्थापना, समयबद्ध मरम्मत और जवाबदेही तय किए जाने से यह सुधार संभव हुआ है।

बैठक में बताया गया कि इस वर्ष अप्रैल और मई माह में पिछले वर्ष की तुलना में तापमान में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जिसके कारण प्रदेश में बिजली मांग में लगातार बढ़ोतरी हुई है।

15 अप्रैल से 22 मई के बीच औसत डिमांड मेट 501 मिलियन यूनिट प्रतिदिन से बढ़कर 561 मिलियन यूनिट प्रतिदिन हो गया, जबकि पीक डिमांड मेट 29,831 मेगावाट से बढ़कर 30,339 मेगावाट तक पहुंच गया।

बैठक में बताया गया कि 20, 21 और 22 मई को उत्तर प्रदेश देश में सर्वाधिक बिजली मांग पूरी करने वाले राज्यों में दूसरे स्थान पर रहा। मुख्यमंत्री ने बढ़ती मांग के अनुरूप विद्युत उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सभी संभावित स्रोतों से बिजली खरीद और आपूर्ति प्रबंधन के निर्देश दिए। 15 मई से विभिन्न पावर प्लांटों में अलग-अलग कारणों से बिजली उपलब्धता प्रभावित हुई। इसके बावजूद उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन द्वारा 12 राज्यों के साथ पावर बैंकिंग व्यवस्था की गई है।

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