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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:20 · नई दिल्ली संस्करण

बाबूलाल बोले- हेमंत सरकार की नीतियों से कोल्हान में बढ़ी गरीबी और बेरोजगारी

राष्ट्रीय सागर डेस्क4 मिनट का पठन
बाबूलाल बोले- हेमंत सरकार की नीतियों से कोल्हान में बढ़ी गरीबी और बेरोजगारी

पश्चिमी सिंहभूम। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) फंड के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खदान प्रभावित क्षेत्रों के विकास और वहां रहने वाले लोगों के कल्याण के उद्देश्य से इस फंड की व्यवस्था की थी, लेकिन चाईबासा सहित खनन प्रभावित क्षेत्रों में इसका लाभ कहीं दिखाई नहीं देता। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार और प्रशासन के संरक्षण में डीएमएफटी फंड की केवल बंदरबांट और लूट हुई है।

बुधवार को चाईबासा स्थित भाजपा जिला कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में बाबूलाल मरांडी ने कहा कि उन्होंने पिछले तीन दिनों तक कोल्हान क्षेत्र का दौरा कर लोगों से मुलाकात की और जमीनी स्थिति का आकलन किया। इस दौरान जो तस्वीर सामने आई, वह बेहद चिंताजनक और पीड़ादायक है। उन्होंने कहा कि झारखंड और विशेषकर कोल्हान क्षेत्र में व्याप्त गरीबी, बेरोजगारी और अविकास के लिए हेमंत सोरेन सरकार पूरी तरह जिम्मेदार है। उन्होंने डीएमएफटी फंड के उपयोग को लेकर राज्य सरकार से श्वेत पत्र जारी करने की मांग की।

मरांडी ने कहा कि पूर्व की सरकारों ने भी खदान प्रभावित क्षेत्रों की उपेक्षा की थी, लेकिन वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस समस्या को ध्यान में रखते हुए डीएमएफटी फंड की व्यवस्था की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री गुजरात के मुख्यमंत्री रहने के दौरान खनन क्षेत्रों की समस्याओं से भली-भांति परिचित थे। इस योजना के तहत जिला उपायुक्त (डीसी) को फंड का अध्यक्ष बनाया गया ताकि खदान प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विकास सुनिश्चित किया जा सके। हालांकि, उनके हालिया दौरे में कहीं भी इस योजना का प्रभाव नजर नहीं आया।

नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि पिछले दस वर्षों में अकेले चाईबासा जिले को डीएमएफटी मद में 3,742.15 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जिनमें से 75.68 प्रतिशत राशि खर्च भी कर दी गई। इसके बावजूद खदान प्रभावित गांवों की मूलभूत समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस फंड का दुरुपयोग किया गया है और यह आर्थिक अपराध की श्रेणी में आता है।

मरांडी ने पारदर्शिता के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि डीएमएफटी फंड से हुए सभी खर्चों का विवरण संबंधित पोर्टल पर अपलोड किया जाना चाहिए था, ताकि आम लोग यह देख सकें कि राशि कहां और किस कार्य पर खर्च की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने जानबूझकर यह जानकारी सार्वजनिक नहीं की। उन्होंने पत्रकारों से भी इस मामले की जांच करने और जिला प्रशासन से खर्च का पूरा विवरण मांगने की अपील की।

खनन क्षेत्र में निवेश और रोजगार के मुद्दे पर मरांडी ने कहा कि देशभर में अब तक 434 खदानों की नीलामी हो चुकी है, जबकि झारखंड में केवल तीन खदानों का ऑक्शन हुआ है और वह भी राज्य सरकार ने नहीं बल्कि केंद्र सरकार ने कराया। उन्होंने कहा कि यदि राज्य सरकार समय पर खदानों की नीलामी करती, तो स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलता और पलायन की समस्या इतनी गंभीर नहीं होती। उन्होंने आरोप लगाया कि अनेक खदानें वर्षों से बंद पड़ी हैं, जिससे हजारों लोगों के रोजगार के अवसर समाप्त हो गए हैं।

बाबूलाल ने पड़ोसी राज्य ओडिशा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां 45 कोयला एवं गैर-कोयला खदानों की नीलामी की गई, जिससे राज्य को बड़ा आर्थिक लाभ मिला। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 में झारखंड को खनिज रॉयल्टी के रूप में लगभग 22 हजार करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जबकि ओडिशा को करीब 46 हजार करोड़ रुपये की आय हुई। यह अंतर केवल प्रभावी खनन नीति और समय पर खदानों की नीलामी का परिणाम है। उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड में देश के कुल खनिज भंडार का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा मौजूद है, जबकि ओडिशा के पास केवल 17 प्रतिशत खनिज भंडार है। इसके बावजूद झारखंड राजस्व और विकास के मामले में पीछे है, जो गंभीर चिंता का विषय है।

मरांडी ने कहा कि राज्य के वित्त मंत्री ने ओडिशा की व्यवस्था का अध्ययन करने के लिए वहां टीम भेजने की बात कही है, लेकिन सरकार चाहे तो उनसे भी सुझाव ले सकती है कि खनिज संसाधनों का बेहतर उपयोग कर राजस्व कैसे बढ़ाया जा सकता है।

बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार के विदेशी दौरों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि निवेश आकर्षित करने के नाम पर सरकार लगातार विदेश यात्राएं कर रही है और बड़े-बड़े एमओयू पर हस्ताक्षर किए जा रहे हैं, लेकिन उनका कोई ठोस परिणाम धरातल पर दिखाई नहीं दे रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के दावे और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर है।

प्रेसवार्ता में पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा, पूर्व सांसद गीता कोड़ा, पूर्व मंत्री बड़कुंवर गगराई, भाजपा के पूर्व प्रदेश प्रवक्ता जेबी तुबिद, प्रदेश प्रवक्ता मृत्युंजय शर्मा सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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