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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 4:31 · नई दिल्ली संस्करण

झारखंड के सारंडा में नक्सलियों के आईईडी विस्फोट में घायल एक और हाथी ने तोड़ा दम

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
झारखंड के सारंडा में नक्सलियों के आईईडी विस्फोट में घायल एक और हाथी ने तोड़ा दम

चाईबासा। झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा जंगल में नक्सलियों द्वारा बिछाए गए आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) की चपेट में आकर घायल हुए हाथी ने आखिरकार दम तोड़ दिया। पिछले 10 दिनों से वन विभाग और पशु चिकित्सकों की टीम जंगल के भीतर ही हाथी को बचाने की जद्दोजहद कर रही थी, लेकिन तमाम कोशिशें नाकाम रहीं।

हाथी के शव का पोस्टमार्टम कराने की तैयारी चल रही है। वन विभाग के अनुसार, सारंडा के सासंगदा-लेबरागढ़ा नाला के पास इस घायल हाथी का उपचार चल रहा था। चूंकि यह क्षेत्र नक्सलियों की मौजूदगी के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है, इसलिए सुरक्षा कारणों से हाथी को किसी अन्य सुरक्षित स्थान या अस्पताल ले जाना संभव नहीं हो पाया।

मनोहरपुर प्रखंड के पशु चिकित्सकों की देखरेख में उसे नियमित दवाइयां और इंजेक्शन दिए जा रहे थे। साथ ही, विभाग की ओर से उसे प्रतिदिन एक से डेढ़ क्विंटल सब्जियां भी खिलाई जा रही थीं।

ताजा घटना 4 मई को हुई थी, जब कोयना वन प्रक्षेत्र के कोलभोंगा के पास हाथी का अगला पैर जमीन में दबे आईईडी पर पड़ने से जोरदार धमाका हुआ था। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि हाथी का पैर बुरी तरह जख्मी हो गया और वह चलने में पूरी तरह असमर्थ हो गया था। इस दुखद अंत के बाद स्थानीय ग्रामीणों और वन्यजीव प्रेमियों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि सुरक्षा बलों के लिए बिछाए गए ये जाल अब बेजुबान जानवरों के लिए काल बन रहे हैं।

स्थानीय लोगों ने मांग की है कि वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं और इस तरह की हरकतों पर लगाम लगाई जाए। सारंडा के जंगलों में हाथियों के आईईडी विस्फोट की चपेट में आने की यह कोई पहली घटना नहीं है। पिछले वर्ष 12 अक्टूबर को एक हथिनी की भी आईईडी विस्फोट में घायल होने के बाद मौत हो गई थी।

वहीं, जुलाई 2025 में छह साल के हाथी ‘गडरू’ ने भी इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। वह 24 जून 2025 को विस्फोट में घायल हुआ था। उसे बचाने के लिए गुजरात की संस्था ‘वनतारा’ की मेडिकल टीम ने भी प्रयास किए थे।

वन विभाग के मुताबिक, सारंडा क्षेत्र में नक्सलियों द्वारा बिछाए गए आईईडी की चपेट में आकर अब तक पांच हाथियों की मौत हो चुकी है।

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