बिना चिप के AI भी है अधूरा! 18 साल के रेहान ने ₹80 करोड़ का प्रोजेक्ट बना दिया, PM मोदी ने भी किया सलाम

जिस उम्र में लड़के कॉलेज की काउंसलिंग के लिए भटकते हैं, उस उम्र में अहमदाबाद के 18 साल के रेहान मंसूरी ने देश के सबसे जरूरी सेक्टर में अपनी कंपनी खड़ी कर दी है। रेहान ने 'माइक्रोनेक्स' (Micronex) नाम से सेमीकंडक्टर स्टार्टअप शुरू किया है, जो गुजरात के साणंद में ₹80 करोड़ के निवेश से लीड फ्रेम बनाएगी। वो छोटा सा पुर्जा जिसके बिना AI, फोन, कार कुछ भी नहीं चलता। आप ChatGPT से सवाल पूछते हैं, AI जवाब देता है, लेकिन उस AI को चलाने के लिए जो चिप लगती है, उसकी पैकेजिंग बिना लीड फ्रेम के मुमकिन ही नहीं।
लीड फ्रेम एक बेहद पतला, प्रिसीजन मेटल का ढांचा होता है जो चिप की बॉडी बनता है, उसे करंट देता है और हीट से बचाता है। मतलब चिप का स्ट्रक्चरल बैकबोन अब तक भारत इस छोटे से पुर्जे के लिए जापान और ताइवान पर निर्भर था। रेहान की कंपनी यही गैप भरेगी। गुजरात में इस वक्त करीब ₹1.4 लाख करोड़ का सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम बन रहा है। माइक्रोन, केन्स सेमीकॉन, CG सेमी जैसे 12 प्रोजेक्ट्स को केंद्र सरकार पहले ही मंजूरी दे चुकी है। इसी के बीच साणंद अब नया हब बन रहा है और रेहान ने वहीं अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने का फैसला किया।
कंपनी की असली उड़ान 'SEMICON India 2026' में दिखी। 17 से 19 सितंबर को नई दिल्ली के यशोभूमि में हुए इस बड़े इवेंट में माइक्रोनेक्स ने दिग्गज कंपनी Kaynes Semicon के साथ MoU साइन किया। Kaynes का प्लांट इस साल प्रोडक्शन शुरू कर चुका है और अब वही माइक्रोनेक्स का पहला बड़ा ग्राहक होगा। आज हम AI की बात करते हैं, लेकिन AI की असली ताकत है चिप। पीएम मोदी ने SEMICON 2026 में खुद कहा था कि 2014 में भारत 1.9 लाख करोड़ का इलेक्ट्रॉनिक्स बनाता था, आज 12 लाख करोड़ का बना रहा है। लेकिन जब तक अपनी चिप नहीं, तब तक आत्मनिर्भरता अधूरी है।
सरकार अब Semicon 2.0 ला रही है, ₹1,27,500 करोड़ का बजट। इसमें फैब के लिए 40% और पैकेजिंग के लिए 35% सब्सिडी है। रेहान जैसे युवा इसी स्कीम की सबसे बड़ी सफलता हैं। रेहान की कहानी सिर्फ एक स्टार्टअप की नहीं है। ये बताती है कि भारत का अगला टेक लीडर सिलिकॉन वैली से नहीं, साणंद की फैक्ट्री से निकलेगा। 18 साल में जहाँ लोग नौकरी ढूंढते हैं, रेहान ने वो फैक्ट्री बनाई जो AI की नींव बनेगी।
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