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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:42 · नई दिल्ली संस्करण

पीटी रिजल्ट में गड़बड़ी के आरोप, JPSC का घेराव

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
पीटी रिजल्ट में गड़बड़ी के आरोप, JPSC का घेराव

रांची,। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा की प्रारंभिक परीक्षा के रिजल्ट में गड़बड़ियों का आरोप लगाते हुए मंगलवार को रांची में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी सड़कों पर उतर आए। आजसू छात्र संघ के बैनर तले अभ्यर्थियों ने बापू वाटिका से जेपीएससी मुख्यालय तक मार्च निकाला और आयोग कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। इस दौरान अभ्यर्थियों ने परीक्षा परिणाम रद्द करने तथा पूरी चयन प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच की मांग की।

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि आयोग ने देर रात परिणाम जारी कर अनावश्यक संदेह की स्थिति पैदा कर दी। उनका कहना है कि परिणाम से संबंधित दस्तावेज पर किसी सक्षम अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं हैं और अब तक कट-ऑफ अंक भी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।

अभ्यर्थियों ने मांग की कि जिस रात परिणाम जारी किया गया, उस दौरान आयोग परिसर की सीसीटीवी फुटेज की जांच कराई जाए। अभ्यर्थियों ने सोशल मीडिया पर वायरल एक कथित ओएमआर शीट का भी हवाला दिया।

उनका दावा है कि उसमें एक अभ्यर्थी के एक प्रश्नपत्र में 45 में 45 तथा दूसरे में 97 सही उत्तर दर्ज होने का उल्लेख है।

प्रदर्शनकारियों ने इसकी सत्यता की जांच कराने की मांग करते हुए आरोप लगाया कि चयन प्रक्रिया में बाहरी राज्यों के कुछ अभ्यर्थियों को कथित रूप से अनुचित लाभ पहुंचाया गया, जबकि झारखंड के अभ्यर्थियों के हितों की अनदेखी हुई। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए।

उनका कहना था कि परीक्षा की उत्तर कुंजी चार बार जारी की गई, जिससे पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित हुई।

साथ ही, उनका आरोप है कि परिणाम घोषित करते समय निर्धारित नियमों और प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

आयोग कार्यालय के बाहर किसी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। इसके तहत लालपुर चौक से रातू रोड तक सड़क जाम करने की भी चेतावनी दी गई।

अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से हस्तक्षेप की अपील करते हुए परीक्षा परिणाम और पूरी चयन प्रक्रिया की उच्चस्तरीय जांच कराने, कट-ऑफ और अन्य जरूरी जानकारियां सार्वजनिक करने तथा कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की।

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