मूगा सूत का उत्पादन कर आत्मनिर्भर बन रही हैं महिलाएं
शोणितपुर। सुनहरे सूत की भूमि के रूप में प्रसिद्ध असम के शोणितपुर जिला के एक गांव में महिलाएं अब मूगा सूत (सुनहरा सूत) का उत्पादन कर रही हैं। इस मूगा सूत का उत्पादन कर महिलाएं आत्म निर्भर बन रही हैं।शोणितपुर जिले के बरसाला में असम सरकार के रेशम विभाग के मूगा फार्म में रेशम विभाग की मदद से महिलाओं का एक समूह अब रेशम के कीट को पालकर मूगा के सूत के उत्पादन कर रही हैं। क्षेत्र की 13 स्वयं सहायता समूहों की 100 महिलाएं अब बरसाला के मूगा फार्म में 350 बीघा भूमि पर 6,500 सोम के पेड़ों के बीच रेशम कीट का पालकर मूगा के सूत तैयार करने में इन दिनों व्यस्त हैं। यह महिलाएं यहां अस्थायी कैंप लगाकर रेशम के कीट को इकट्ठा करती रहती हैं। रेशन के कीट लेटा बनाया जाता है उसके बाद उचित समय पर मूगा के सूत का उत्पादन किया जाता है।फिलहाल इस मूगा के सूत का बाजार मूल्य 23 हजार रुपये प्रति किलो है। रेशम विभाग यहां मूगा के सूत का उत्पादन कर रहा है। पिछले कई सालों से ये लोग शोणितपुर के बरसाला स्थित मूगा फार्म में मूगा सूत के उत्पादन में लगे हुए हैं। इस बीच, धेमाजी और लखीमपुर जैसे जिलों से कई महिलाएं भी यहां मूगा कीट और एरी कीट पालने की विधि सीखने के लिए आती हैं।असम सरकार के रेशम विभाग ने बरसाला मूगा फार्म को 1970-71 में स्थापित किया था। यहां पर स्थानीय परिवारों के पुरुष और महिलाएं मूगा कीट पालकर और उससे उत्पादित मूगा सूत बेचकर वर्षों से आत्मनिर्भर बन गए हैं। इसी कड़ी में स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं महिलाएं भी मूगा कीट पालकर आत्मनिर्भर बनने का सपना देख रही हैं। मूगा सूत की कीमत वर्तमान में 23 हजार रुपये प्रति किलो है। महिलाओं के इस कदम से अन्य महिलाएं भी प्रोत्साहित हो रही हैं।





