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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 4:49 · नई दिल्ली संस्करण

धार्मिक स्थलों से माइक्रोफोन और लाउडस्पीकर हटाने के बंगाल सरकार के आदेश के खिलाफ कलकत्ता हाई कोर्ट में जनहित याचिका कोलकाता, 10 अगस्त (हि.स.)। पश्चिम बंगाल के सभी धार्मिक स्थलों से माइक्रोफोन और लाउडस्पीकर हटाने के राज्य सरकार के आदेश को चुनौती देते हुए सोमवार को कलकत्ता हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई। याचिका में सरकार के आदेश को वापस लेने की मांग की गई है। यह जनहित याचिका तृणमूल कांग्रेस के चार बार लोकसभा सदस्य रह चुके वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने वकील दानिश फारूकी के माध्यम से दायर की है। याचिकाकर्ता ने विशेष रूप से मस्जिदों से माइक्रोफोन और लाउडस्पीकर हटाने के निर्देश के कानूनी आधार पर सवाल उठाया है। कल्याण बनर्जी ने दावा किया कि मस्जिदों से लाउडस्पीकर और माइक्रोफोन हटाने की कार्रवाई पुलिस ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के मौखिक निर्देश के आधार पर की। उन्होंने आरोप लगाया कि नए शासन में पश्चिम बंगाल में यह एक नया चलन बन गया है, जिसमें मुख्यमंत्री की ओर से दिए गए निर्देश को बिना किसी आधिकारिक आदेश या ज्ञापन के पुलिस लागू कर देती है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तपब्रत चक्रवर्ती की अध्यक्षता वाली कलकत्ता हाई कोर्ट की खंडपीठ ने जनहित याचिका स्वीकार कर ली है। हालांकि, मामले की पहली सुनवाई की तारीख अभी तय नहीं की गई है। इसी मुद्दे को लेकर सोमवार को हाई कोर्ट की एकल पीठ में एक अन्य याचिका भी दायर की गई। न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की पीठ में दाखिल इस याचिका में मंगलवार को उत्तर कोलकाता के राजाबाजार से मध्य कोलकाता स्थित रानी रासमणि रोड तक विरोध रैली निकालने की अनुमति मांगी गई है। यह याचिका अब्दुल समद नामक व्यक्ति ने दायर की है। उनकी ओर से माकपा नेता और अधिवक्ता सब्यसाची चट्टोपाध्याय ने अदालत में पैरवी की। बताया गया है कि न्यायमूर्ति भट्टाचार्य की पीठ इस मामले पर सोमवार को बाद में सुनवाई कर सकती है। इससे पहले विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर मस्जिदों को निशाना बनाकर वहां से लाउडस्पीकर और माइक्रोफोन हटाने का आरोप लगाया था। हालांकि, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने स्पष्ट किया था कि कार्रवाई केवल मस्जिदों तक सीमित नहीं है, बल्कि मंदिरों समेत सभी धार्मिक स्थलों पर लागू है।

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
धार्मिक स्थलों से माइक्रोफोन और लाउडस्पीकर हटाने के बंगाल सरकार के आदेश के खिलाफ कलकत्ता हाई कोर्ट में जनहित याचिका  कोलकाता, 10 अगस्त (हि.स.)। पश्चिम बंगाल के सभी धार्मिक स्थलों से माइक्रोफोन और लाउडस्पीकर हटाने के राज्य सरकार के आदेश को चुनौती देते हुए सोमवार को कलकत्ता हाई कोर्ट में जनहित याचिका

कोलकाता। पश्चिम बंगाल के सभी धार्मिक स्थलों से माइक्रोफोन और लाउडस्पीकर हटाने के राज्य सरकार के आदेश को चुनौती देते हुए सोमवार को कलकत्ता हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई। याचिका में सरकार के आदेश को वापस लेने की मांग की गई है।

यह जनहित याचिका तृणमूल कांग्रेस के चार बार लोकसभा सदस्य रह चुके वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने वकील दानिश फारूकी के माध्यम से दायर की है। याचिकाकर्ता ने विशेष रूप से मस्जिदों से माइक्रोफोन और लाउडस्पीकर हटाने के निर्देश के कानूनी आधार पर सवाल उठाया है।

कल्याण बनर्जी ने दावा किया कि मस्जिदों से लाउडस्पीकर और माइक्रोफोन हटाने की कार्रवाई पुलिस ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के मौखिक निर्देश के आधार पर की। उन्होंने आरोप लगाया कि नए शासन में पश्चिम बंगाल में यह एक नया चलन बन गया है, जिसमें मुख्यमंत्री की ओर से दिए गए निर्देश को बिना किसी आधिकारिक आदेश या ज्ञापन के पुलिस लागू कर देती है।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तपब्रत चक्रवर्ती की अध्यक्षता वाली कलकत्ता हाई कोर्ट की खंडपीठ ने जनहित याचिका स्वीकार कर ली है। हालांकि, मामले की पहली सुनवाई की तारीख अभी तय नहीं की गई है।

इसी मुद्दे को लेकर सोमवार को हाई कोर्ट की एकल पीठ में एक अन्य याचिका भी दायर की गई। न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की पीठ में दाखिल इस याचिका में मंगलवार को उत्तर कोलकाता के राजाबाजार से मध्य कोलकाता स्थित रानी रासमणि रोड तक विरोध रैली निकालने की अनुमति मांगी गई है।

यह याचिका अब्दुल समद नामक व्यक्ति ने दायर की है। उनकी ओर से माकपा नेता और अधिवक्ता सब्यसाची चट्टोपाध्याय ने अदालत में पैरवी की। बताया गया है कि न्यायमूर्ति भट्टाचार्य की पीठ इस मामले पर सोमवार को बाद में सुनवाई कर सकती है।

इससे पहले विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर मस्जिदों को निशाना बनाकर वहां से लाउडस्पीकर और माइक्रोफोन हटाने का आरोप लगाया था। हालांकि, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने स्पष्ट किया था कि कार्रवाई केवल मस्जिदों तक सीमित नहीं है, बल्कि मंदिरों समेत सभी धार्मिक स्थलों पर लागू है।

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