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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:57 · नई दिल्ली संस्करण

भ्रष्टाचार पर 'जीरो टॉलरेंस', सत्ता परिवर्तन के बाद बंगाल भाजपा का बड़ा एक्शन; 200 से अधिक नेताओं-कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
भ्रष्टाचार पर 'जीरो टॉलरेंस', सत्ता परिवर्तन के बाद बंगाल भाजपा का बड़ा एक्शन; 200 से अधिक नेताओं-कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता के खिलाफ अपनी "जीरो टॉलरेंस" नीति को अमल में लाते हुए पिछले तीन महीनों में 200 से अधिक नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की है। पार्टी की राज्य इकाई की आंतरिक अनुशासन समिति ने पहली बार इस कार्रवाई का विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक किया है।

समिति के अनुसार मई, जून और जुलाई के दौरान भ्रष्टाचार, उगाही, अनुशासनहीनता तथा पार्टी की नीतियों के विपरीत आचरण से संबंधित लगातार शिकायतों के आधार पर 200 से अधिक लोगों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए। इनमें से लगभग 50 नोटिस चार मई को विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद पहले तीन सप्ताह के भीतर ही जारी कर दिए गए थे।

आंतरिक अनुशासन समिति के एक सदस्य ने बताया कि कारण बताओ नोटिस पाने वाले सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को अगले आदेश तक संगठनात्मक गतिविधियों से दूर रहने का निर्देश दिया गया था, जिसे अनिश्चितकालीन निलंबन के समान माना गया।

समिति के अनुसार अब तक इन मामलों में लगभग 50 प्रतिशत का निस्तारण हो चुका है। कई लोगों ने बिना शर्त माफी मांग ली, जबकि कुछ ने अपने पक्ष में साक्ष्य प्रस्तुत किए। संतोषजनक जवाब मिलने के बाद ऐसे लोगों का निलंबन वापस लेकर उन्हें संगठनात्मक गतिविधियों में फिर से शामिल कर लिया गया।

हालांकि, अभी भी 100 से अधिक नेता और कार्यकर्ता अनिश्चितकालीन निलंबन के दायरे में हैं। इनमें लगभग 30 लोगों पर भ्रष्टाचार और उगाही के गंभीर आरोप हैं। अन्य निलंबित व्यक्तियों पर पार्टी अनुशासन का उल्लंघन, नेतृत्व के निर्देशों की अवहेलना तथा प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक दलों के कार्यालयों पर जबरन कब्जा करने जैसे आरोप लगाए गए हैं।

सत्ता परिवर्तन के बाद से भाजपा का शीर्ष राज्य नेतृत्व लगातार नेताओं और कार्यकर्ताओं को भ्रष्टाचार, उगाही तथा अन्य अनैतिक गतिविधियों से दूर रहने की चेतावनी देता रहा है। सबसे पहले प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद समीक भट्टाचार्य ने इस मुद्दे पर सख्त संदेश दिया था। इसके बाद राज्य मंत्रिमंडल के वरिष्ठ सदस्य दिलीप घोष और अग्निमित्रा पॉल सहित अन्य नेताओं ने भी इसी प्रकार की चेतावनी जारी की।

अनुशासन समिति के सदस्य ने कहा कि पिछले तीन महीनों में हुई कार्रवाई का ब्यौरा यह साबित करता है कि पार्टी नेतृत्व की चेतावनियां केवल औपचारिक नहीं थीं। साथ ही यह उन लोगों के लिए भी स्पष्ट संदेश है जो अब भी पार्टी की नीति के विपरीत गतिविधियों में शामिल हैं।

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