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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 6:20 · नई दिल्ली संस्करण

बसंत पंचमी के साथ ही क्यों होती है होली के उत्सव की शुरुआत? जानें धर्म और ऋतु के बीच का कनेक्शन

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
बसंत पंचमी के साथ ही क्यों होती है होली के उत्सव की शुरुआत? जानें धर्म और ऋतु के बीच का कनेक्शन

नई दिल्ली। मकर संक्रांति के बाद देशभर में बसंत पंचमी की तैयारी शुरू हो चुकी है। बसंत पंचमी का त्योहार हिंदू धर्म से जुड़ा है। इस दिन विद्या की देवी मां सरस्वती की आराधना की जाती है, लेकिन बसंत पंचमी के साथ ही होली के कार्यक्रम के उत्सव भी शुरू हो जाते हैं, जबकि होली फाल्गुन मास में मनाई जाती है।

आज हम आपको बसंत पंचमी और होली के बीच के धार्मिक कनेक्शन के बारे में बताएंगे।

बसंत ऋतु के साथ ही बसंत पंचमी का भी आगमन होता है। यह दिन संकेत होता है कि अब सर्दी जाने वाली है और बसंत ऋतु का आगमन हो रहा है। बसंत ऋतु के मौसम को ऋतुओं का राजा कहा जाता है, क्योंकि इस समय प्रकृति का सबसे प्यारा रूप देखने को मिलता है, जहां हर तरफ पेड़ों पर फूल और सरसों के खेत पीले फूलों से लहलहा उठते हैं, इसीलिए इस ऋतु को नई खुशियों, नई ऊर्जा, और प्रकृति में बहार का प्रतीक माना गया है।

इसे प्रकृति को पूजने का दिन माना गया है।

बसंत पंचमी और होली दोनों ही बसंत ऋतु से जुड़े त्योहार हैं। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, बसंत ऋतु का आगमन भी होली के उत्सव का संकेत देता है। इसी दिन से फाग के गीत गाने शुरू कर दिए जाते हैं। खासकर ब्रज क्षेत्र में बसंत पंचमी से होली की शुरुआत हो जाती है और ये उत्सव 40 दिन तक चलता है। हर दिन मंदिरों में भगवान को गुलाल अर्पित किए जाते हैं।

बसंत ऋतु से प्रकृति अपने 12 रंगों को दिखाने लगती है और नई ऊर्जा का उत्सव मनाती है। यही कारण है कि इसी एक महीने तक प्रकृति के रंगों के साथ होली की तैयारी की जाती है। इसे प्रकृति का उत्सव भी कहा जाता है।

बसंत पंचमी पर जहां शांति और ज्ञान की देवी मां सरस्वती की पूजा होती है, तो वहीं ऋतु के जाते-जाते और फाल्गुन माह के करीब आते-आते शांति, उत्साह और उल्लास में बदल जाती है। पौराणिक कथाओं में बसंत पंचमी और होली को लेकर कथाएं प्रचलित हैं। माना जाता है कि सृष्टि में रंग भरने और प्रेम बनाए रखने के लिए कामदेव और रति ने भगवान शिव की तपस्या को भंग किया था। इसी के बाद से बसंत पंचमी से लेकर होली तक के समय को प्रेम और उत्साह का समय माना गया है।

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