ट्रम्प प्रशासन को झटका: कोर्ट ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों के प्रवेश पर रोक के आदेश पर लगाया गया प्रतिबंध हटाया

अमेरिकी राजनीति और स्वतंत्र पत्रकारिता के बीच एक बड़े टकराव के मामले में, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा मीडिया घरानों पर लगाए गए प्रतिबंध को अंततः कोर्ट ने खारिज कर दिया है। यह पूरा घटनाक्रम प्रेस की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति के अधिकारों को लेकर एक बड़ी कानूनी बहस का केंद्र बन गया था।
घटना की शुरुआत तब हुई जब डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने कुछ प्रमुख मीडिया संस्थानों और उनके पत्रकारों के व्हाइट हाउस में आधिकारिक प्रवेश पर रोक लगा दी थी। ट्रंप प्रशासन का तर्क था कि ये मीडिया घराने उनके खिलाफ पक्षपातपूर्ण और झूठी खबरें प्रकाशित कर रहे हैं। इस एकतरफा और सख्त फैसले के खिलाफ प्रभावित मीडिया संस्थानों ने एकजुट होकर अदालत का दरवाजा खटखटाया और मुकदमा दायर किया।
अदालत में सुनवाई के दौरान मीडिया संस्थानों के वकीलों ने जोरदार दलील दी कि यह प्रतिबंध कानून का खुला उल्लंघन है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिकी संविधान राष्ट्रपति या किसी भी सरकारी अधिकारी को इस बात का अधिकार नहीं देता कि वह केवल नापसंद खबरों के आधार पर किसी प्रेस संस्थान को प्रतिबंधित कर दे। बिना किसी उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन किए पत्रकारों को उनके प्रथम संशोधन (फर्स्ट अमेंडमेंट) से जुड़े अधिकारों और स्वतंत्रता से वंचित करना पूरी तरह असंवैधानिक है।
दूसरी ओर, अमेरिका के न्याय विभाग (जस्टिस डिपार्टमेंट) के वकीलों ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए इस बैन को सही ठहराने की भरपूर कोशिश की। हालांकि, अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज ने प्रशासन की दलीलों को खारिज करते हुए व्हाइट हाउस में मीडिया घरानों पर लगाए गए बैन को अवैध करार दिया और इसे तुरंत हटाने का आदेश दिया।
इस पूरे कानूनी विवाद के बीच, संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान भी ट्रंप का मीडिया के प्रति कड़ा रुख देखने को मिला, जब उन्होंने एक प्रतिष्ठित पत्रकार को टोकते हुए सार्वजनिक रूप से कहा कि उन्हें यहां उनकी कवरेज नहीं करनी चाहिए। हालांकि, उस पत्रकार ने बाद में स्पष्ट किया कि उन्होंने ऐसा कोई बयान नहीं दिया था। कोर्ट के इस फैसले को अमेरिकी मीडिया जगत में प्रेस की आजादी की एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है।





