डॉनल्ड ट्रंप के नए फैसलों से संकट में भारत का कपड़ा निर्यात, सरकार से दखल की मांग

भारतीय कपड़ा उद्योग अमेरिका द्वारा लगाए गए नए भारी शुल्कों को लेकर गहरी चिंता में है। कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री (सीआईटीआई) ने आगाह किया है कि इन शुल्कों का सीधा असर भारत के कपड़ा और परिधान निर्यात पर पड़ सकता है, क्योंकि अमेरिका इस उद्योग का सबसे बड़ा बाजार है। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026 पर हस्ताक्षर कर रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी का नया टैरिफ लगाने का ऐलान किया है, जिसने भारतीय उद्योग की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
सीआईटीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यदि इस कानून के तहत भारत पर कोई अतिरिक्त शुल्क लगाया जाता है, तो भारतीय कपड़ा और परिधान उद्योग के लिए इसे संभालना बेहद मुश्किल होगा। उन्होंने विशेष रूप से छोटे और मझोले उद्योगों का जिक्र किया, जो पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, जिसमें पश्चिम एशिया में जारी तनाव भी शामिल है। चंद्रन के अनुसार, ये नए शुल्क भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार में अपने उत्पादों को बेचना और भी कठिन बना देंगे, जिससे भारत के कपड़ा और परिधान निर्यात पर नकारात्मक दबाव पड़ेगा।
उद्योग ने भारत सरकार से अमेरिका के साथ बातचीत तेज करने का आग्रह किया है, ताकि भारतीय निर्यातकों को दुनिया के सबसे बड़े बाजार में व्यापार करने में बाधा न आए। उन्होंने भारत और अमेरिका के बीच एक निष्पक्ष, संतुलित और बराबरी वाले द्विपक्षीय व्यापार समझौते की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया, जिसकी बातचीत अंतिम दौर में है। उन्होंने स्वीकार किया कि अन्य देशों के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) से नए बाजार जरूर खुलेंगे, लेकिन उनका लाभ तुरंत नहीं मिलेगा और वे अमेरिकी बाजार की भरपाई नहीं कर सकते।
इन समझौतों में काफी संभावनाएं हैं, लेकिन उनका फायदा तुरंत नहीं मिलेगा। इसके लिए कंपनियों को समय और लगातार कोशिश करनी होगी। भारत-यूरोपीय संघ का एफटीए अगले साल लागू होने की उम्मीद है, जबकि भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता 15 जुलाई 2026 से लागू हो चुका है।





