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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 4:29 · नई दिल्ली संस्करण

पश्चिम बंगाल में डीजीपी की नियुक्ति पर पेंच, यूपीएससी ने सुप्रीम कोर्ट जाने की दी सलाह

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
पश्चिम बंगाल में डीजीपी की नियुक्ति पर पेंच, यूपीएससी ने सुप्रीम कोर्ट जाने की दी सलाह

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति को लेकर जटिलता बढ़ती नजर आ रही है। मौजूदा डीजीपी राजीव कुमार का कार्यकाल 31 जनवरी को समाप्त होने वाला है, लेकिन उनके उत्तराधिकारी की नियुक्ति पर अब तक स्थिति साफ नहीं हो पाई है।

इसी बीच, संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट से आवश्यक अनुमति लेने की सलाह दी है।

यूपीएससी के निदेशक नंद किशोर कुमार ने पश्चिम बंगाल की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को पत्र लिखकर कहा है कि राजीव कुमार के उत्तराधिकारी की नियुक्ति के लिए राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट का रुख करना चाहिए। यूपीएससी ने राज्य सरकार द्वारा भेजी गई आईपीएस अधिकारियों की सूची भी लौटा दी है, जिनमें से किसी एक को नया डीजीपी बनाए जाने की सिफारिश की गई थी।

नियमों के अनुसार, किसी भी राज्य सरकार को डीजीपी पद के लिए राज्य में कार्यरत तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की सूची यूपीएससी को भेजनी होती है। इसके बाद यूपीएससी इन तीन नामों में से एक नाम को अंतिम रूप से मंजूरी देता है, लेकिन पश्चिम बंगाल के मामले में यह प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हो पाई।

इस पूरे विवाद की जड़ दिसंबर 2023 में तत्कालीन डीजीपी मनोज मालवीय के सेवानिवृत्त होने से जुड़ी है।

उस समय राज्य सरकार को उनके उत्तराधिकारी के लिए तीन आईपीएस अधिकारियों का पैनल भेजना था, लेकिन ऐसा करने के बजाय राज्य सरकार ने राजीव कुमार को कार्यवाहक डीजीपी नियुक्त कर दिया। राज्य सरकार ने बाद में उनके स्थायी उत्तराधिकारी के लिए आईपीएस अधिकारियों का पैनल भेजा, जिसे यूपीएससी ने स्वीकार नहीं किया।

यूपीएससी के निदेशक ने मुख्य सचिव को लिखे पत्र में सुप्रीम कोर्ट के जुलाई 2018 के आदेश का हवाला दिया है।

इस आदेश के अनुसार, किसी भी राज्य सरकार को मौजूदा डीजीपी के सेवानिवृत्त होने से कम से कम तीन महीने पहले नए डीजीपी के लिए आईपीएस अधिकारियों का पैनल भेजना अनिवार्य है।

इस आधार पर यूपीएससी का कहना है कि पश्चिम बंगाल सरकार को सितंबर 2023 में ही पैनल भेज देना चाहिए था, क्योंकि मनोज मालवीय दिसंबर 2023 में सेवानिवृत्त हुए थे। पत्र में यह भी बताया गया है कि इस मामले में आयोग ने भारत के अटॉर्नी जनरल से भी सलाह ली थी। अटॉर्नी जनरल ने भी यही राय दी है कि राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट से अनुमति लेकर ही राजीव कुमार के उत्तराधिकारी की नियुक्ति करनी चाहिए।

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