मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
Rajasthan Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव का ऐलान, 4 चरणों में होगी वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूलमुंबई में CJP का प्रदर्शन पड़ा भारी! जेल भरो आंदोलन पर FIR, आयोजकों में हड़कंपज्ञानेश कुमार पर चले लोकतंत्र की हत्या का मुकदमा! प्रमोद तिवारी का बड़ा हमलाBJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी अब साइकिल पर सवार, समाजवादी पार्टी में हुए शामिलCM Yogi का बड़ा तोहफा: 4.60 लाख छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति, आपके खाते में आई क्या? चेक करेंNoida: सुपरनोवा की 43वीं मंजिल से युवक ने लगाई छलांग, मौके पर दर्दनाक मौत, सोसाइटी में हड़कंपमुंबई प्रदर्शन के बाद CJP का दिल्ली कूच का ऐलान, अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बातगठबंधन में फूट! रायबरेली से डरते थे राहुल गांधी! सपा नेता का बड़ा खुलासा, अखिलेश ने दी थी धमकी

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 4:22 · नई दिल्ली संस्करण

एसआईआर : मतदाता सूची सुनवाई के लिए दो हजार अतिरिक्त माइक्रो-ऑब्ज़र्वरों की नियुक्ति पर ईसीआई ने दिया स्पष्टीकरण

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
एसआईआर : मतदाता सूची सुनवाई के लिए दो हजार अतिरिक्त माइक्रो-ऑब्ज़र्वरों की नियुक्ति पर ईसीआई ने दिया स्पष्टीकरण

कोलकाता। चुनाव आयोग (ईसीआई) ने पश्चिम बंगाल में मसौदा मतदाता सूची पर दावों और आपत्तियों की सुनवाई के लिए दो हजार अतिरिक्त माइक्रो-ऑब्ज़र्वरों की नियुक्ति के निर्णय को स्पष्ट किया है। साथ ही, सुनवाई केंद्रों की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव पर भी विचार किया जा रहा है।मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, यह निर्णय केवल “प्रोजेनी मैपिंग” के दौरान सामने आए बड़ी संख्या में “लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी” मामलों के कारण नहीं लिया गया है, बल्कि इन विसंगतियों की विविध प्रकृति को देखते हुए भी आवश्यक माना गया। आयोग के अनुसार, प्रोजेनी मैपिंग में कुल करीब नौ लाख मामलों में विसंगतियां पाई गई हैं, जिनमें कम से कम छह प्रकार की त्रुटियां चिन्हित की गई हैं। कई मामलों में एक से अधिक विसंगतियां भी सामने आई हैं।सीईओ कार्यालय के सूत्र ने बताया, “एक ओर 14 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन से पहले निर्धारित समय-सीमा के भीतर सुनवाई पूरी करनी है, वहीं आयोग यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि किसी भी वास्तविक मतदाता का नाम सूची से न हटे और किसी भी फर्जी मतदाता का नाम सूची में न रहे। इन उद्देश्यों को पूरा करने के लिए मामलों की गहन जांच आवश्यक है, इसलिए माइक्रो-ऑब्ज़र्वरों की संख्या बढ़ाने की जरूरत पड़ी।”नवनियुक्त दो हजार माइक्रो-ऑब्ज़र्वरों को 15 जनवरी को प्रशिक्षण दिया जाएगा और अगले ही दिन से उन्हें विभिन्न सुनवाई केंद्रों में तैनात कर दिया जाएगा। पूर्व की तरह, ये नियुक्तियां केंद्र सरकार के कर्मचारियों, केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों या सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के समूह ‘ए’ और ‘बी’ श्रेणी के अधिकारियों में से की जाएंगी।उल्लेखनीय है कि माइक्रो-ऑब्ज़र्वरों की यह नियुक्ति केवल पश्चिम बंगाल के लिए की जा रही है। अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रही समानांतर विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रियाओं में ऐसी व्यवस्था नहीं की गई है।हाल ही में ईसीआई ने पश्चिम बंगाल में तैनात माइक्रो-ऑब्ज़र्वरों को यह चेतावनी भी दी है कि मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) से किसी भी प्रकार का जानबूझकर विचलन पाए जाने पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसके अतिरिक्त, पिछले सप्ताह आयोग ने राज्य के लिए चार और विशेष रोल ऑब्ज़र्वरों की नियुक्ति की घोषणा की थी, जिनके प्रमुख दायित्वों में सुनवाई सत्रों के दौरान माइक्रो-ऑब्ज़र्वरों के कार्य प्रदर्शन की समीक्षा भी शामिल है।

यह ख़बर दूसरों तक पहुँचाएँ

WhatsAppFacebookX

संबंधित ख़बरें