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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 4:00 · नई दिल्ली संस्करण

विमल इलायची केस: दिल्ली हाईकोर्ट से शाहरुख, अजय और टाइगर श्रॉफ को नहीं मिली राहत, याचिका खारिज

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
विमल इलायची केस: दिल्ली हाईकोर्ट से शाहरुख, अजय और टाइगर श्रॉफ को नहीं मिली राहत, याचिका खारिज

दिल्ली उच्च न्यायालय में जस्टिस जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की कोर्ट ने शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्राफ को महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ( FDA) द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस (show-cause notice) रद्द करने की मांग करते विमल इलायची बनाने वाली कंपनी पी.बी. एग्रो द्वारा दायर LLP याचिका खारिज कर दी । विमल इलायची बनाने वाली इस कंपनी पी.बी. एग्रो के ब्रांड एंबेसडर हैं शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ जिन्हें महाराष्ट्र FDA ने यह कारण बताओ नोटिस (show-cause notice) विज्ञापन में प्रोडक्ट को गलत तरीके से पेश करने के आरोप में जारी किया था।

विमल इलायची और बिना तंबाकू वाले पान मसाला की मास्टर लाइसेंसधारी कंपनी पी.बी. एग्रो है। इसने मुंबई के FDA द्वारा अपने उक्त तीनों ब्रांड एंबेसडर को जारी कारण बताओ नोटिस को चुनौती देते यह LLP याचिका देहली उच्च न्यायालय में दायर की थी जिसे सुनवाई उपरांत कोर्ट ने खारिज करते कोर्ट ने कहा कि सिर्फ इसलिए कि कंपनी का बिजनेस और मुख्य फूड सेफ्टी अथॉरिटी राष्ट्रीय राजधानी में हैं, हाईकोर्ट को क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र (Territorial Jurisdiction) नहीं मिल जाता, जबकि विवादित रेगुलेटरी कार्रवाई महाराष्ट्र में शुरू हुई थी।

11 अगस्त का यह नोटिस FDA, ग्रेटर मुंबई डिवीजन के असिस्टेंट कमिश्नर (फूड) ने विमल इलायची के तीन ब्रांड एंबेसडर को जारी किया था, जो सभी मुंबई के रहने वाले हैं। पी.बी. एग्रो ने तर्क दिया कि याचिका भारत के संविधान के आर्टिकल 226(1) और 226(2) के तहत स्वीकार्य है, क्योंकि कंपनी दिल्ली से काम करती है, विज्ञापन अभियान राजधानी से मैनेज किया जाता है, ब्रांड एंबेसडर को पेमेंट दिल्ली से किया जाता है और कथित नुकसान भी वहीं हुआ है। कंपनी ने इस बात पर भी जोर दिया कि फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) और सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) दिल्ली में स्थित हैं।

इन दलीलों को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि विवादित नोटिस का स्रोत और स्वरूप FDA, मुंबई द्वारा अपनी कानूनी शक्तियों के तहत शुरू की गई एक स्वतंत्र कार्रवाई ही है। कोर्ट ने कहा, सिर्फ इसलिए कि FSSAI कानून के तहत शीर्ष संस्था है या यह दिल्ली में स्थित है, इस याचिका में चुनौती दिए गए कारण बताओ नोटिस के स्रोत या स्वरूप को नहीं बदला जा सकता। कोर्ट ने कहा, सिर्फ इसलिए कि याचिकाकर्ता कंपनी दिल्ली में रजिस्टर्ड है और वहां से बिजनेस करती है या उसका ऑफिस है, इसका मतलब यह नहीं है कि किसी दूसरे राज्य की अथॉरिटी द्वारा उसके प्रोडक्ट के खिलाफ की गई हर रेगुलेटरी कार्रवाई इस कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आ जाएगी।

कोर्ट ने माना कि मुख्य विवाद महाराष्ट्र में कथित गतिविधियों के संबंध में FDA मुंबई द्वारा की गई कार्रवाई की वैधता और सही होने से जुड़ा था। कोर्ट ने कहा कि अगर यह मान भी लिया जाए कि केस का कोई मामूली या आनुषंगिक हिस्सा दिल्ली में हुआ था, तो भी फोरम कन्वेनियंस (सुविधाजनक अदालत) के सिद्धांत के तहत अधिकार क्षेत्र को अस्वीकार करना उचित है। कोर्ट ने कहा, माननीय सुप्रीम कोर्ट और इस कोर्ट के पहले के फैसलों को देखते हुए याचिकाकर्ता का दिल्ली से बिजनेस चलाना या दिल्ली से ब्रांड एंबेसडर रखना - खासकर तब जब विवादित नोटिस याचिकाकर्ता को जारी नहीं किया गया।

अपने आप में इस कोर्ट को क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र नहीं देता। कोर्ट ने आगे कहा: इसलिए क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र न होने के कारण इस याचिका को सुनवाई योग्य नहीं माना जाता है। इसके अलावा, कोर्ट यह भी मानता है कि फोरम कन्वेनियंस के सिद्धांत के अनुसार, विवादित नोटिस से जुड़ी अपनी शिकायतों को उठाने के लिए याचिकाकर्ता के लिए महाराष्ट्र की अदालतें अधिक उपयुक्त और सुविधाजनक मंच हैं।

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