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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 8:18 · नई दिल्ली संस्करण

गांव-किसान की समृद्धि से सुदृढ़ भविष्य की नींव, योजनाएं बन रहीं मील का पत्थर

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
गांव-किसान की समृद्धि से सुदृढ़ भविष्य की नींव, योजनाएं बन रहीं मील का पत्थर

जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार गांव और किसानों को मजबूत आधार प्रदान करते हुए विकसित राजस्थान के लक्ष्य की ओर तेजी से अग्रसर है। केंद्र सरकार की योजनाओं के साथ राज्य स्तर पर अतिरिक्त प्रोत्साहन जोड़कर किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के प्रयास किए जा रहे हैं।इसी कड़ी में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों को मिलने वाली सहायता राशि में राजस्थान सरकार ने एक कदम आगे बढ़ाते हुए अतिरिक्त तीन हजार रुपए जोड़ दिए हैं। जहां केंद्र सरकार किसानों को सालाना छह हजार रुपए देती है, वहीं राज्य में यह राशि बढ़कर नौ हजार रुपए हो गई है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा जारी की गई किस्त के तहत प्रदेश के 66 लाख से अधिक किसानों के खातों में 1,355 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि हस्तांतरित की गई। मुख्यमंत्री ने भविष्य में इस राशि को 12 हजार रुपए तक बढ़ाने का संकेत भी दिया है।राज्य सरकार किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ ही जोखिम मुक्त खेती और पशुपालन को भी बढ़ावा दे रही है। वर्ष 2026-27 के लिए कृषि बजट 1.19 लाख करोड़ रुपए निर्धारित किया गया है।गेहूं की समर्थन मूल्य खरीद पर 150 रुपए का बोनस, 78 लाख किसानों को 50 हजार करोड़ से अधिक के ब्याज मुक्त फसली ऋण और फसल बीमा योजना के तहत हजारों करोड़ रुपए के क्लेम वितरण जैसे कदम किसानों को सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं। पशुपालन क्षेत्र में भी मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना के तहत लाखों पशुओं का बीमा और मोबाइल पशु चिकित्सा सेवाएं ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध कराई जा रही हैं।ग्रामीण रोजगार को स्थायित्व देने के लिए विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में उभर रहा है। इस योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों का रोजगार सुनिश्चित किया गया है, जिसमें जल संरक्षण, ग्रामीण अवसंरचना और आजीविका से जुड़े टिकाऊ कार्यों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।डिजिटाइजेशन के माध्यम से पारदर्शिता और जवाबदेही भी तय की जा रही है।सरकार ने कृषि कार्यों के व्यस्त समय को ध्यान में रखते हुए श्रमिकों के लिए 60 दिनों की समेकित विराम अवधि का प्रावधान किया है, ताकि बुवाई और कटाई के दौरान खेतों में श्रमिकों की उपलब्धता बनी रहे और कृषि उत्पादन प्रभावित न हो। इससे किसान और श्रमिक दोनों के हितों में संतुलन स्थापित हो रहा है।सरकार का मानना है कि जब किसान समृद्ध होगा, तभी गांव मजबूत होंगे और गांवों के सशक्त होने से ही राज्य और देश के विकास की मजबूत नींव रखी जा सकेगी। इसी दिशा में उठाए जा रहे ये कदम भविष्य में ग्रामीण समृद्धि के लिए मील का पत्थर साबित हो रहे हैं।

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