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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:28 · नई दिल्ली संस्करण

वाराणसी: मणिकर्णिका घाट सुंदरीकरण विवाद पर सियासत तेज, पाल समाज में आक्रोश

राष्ट्रीय सागर डेस्क4 मिनट का पठन
वाराणसी: मणिकर्णिका घाट सुंदरीकरण विवाद पर सियासत तेज, पाल समाज में आक्रोश

कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल सौंपेगा ज्ञापन, प्रियंका गांधी और खरगे ने सरकार पर साधा निशानावाराणसी। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी काशी के मोक्षतीर्थ मणिकर्णिका घाट पर सुंदरीकरण के नाम पर की जा रही तोड़फोड़ को लेकर विरोध का स्वर तेज होता जा रहा है। सदियों पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से छेड़छाड़ के आरोपों के बीच पाल समाज में गहरी नाराजगी है, वहीं यह मुद्दा अब राजनीतिक रूप से भी गरमा गया है। इस मामले को लेकर कांग्रेस महानगर इकाई शुक्रवार दोपहर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपेगी। उधर, पाल विकास समिति ने प्रेस वार्ता कर सुंदरीकरण कार्यों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। समिति के संरक्षक भइयालाल पाल ने आरोप लगाया कि मणिकर्णिका घाट स्थित लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की मूर्ति को तोड़ दिया गया है और घाट से तीर्थ पुरोहितों को बेदखल किया गया है। इस विवाद पर कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने गुरुवार शाम सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार को घेरा। उन्होंने अपने ‘एक्स’ अकाउंट पर मणिकर्णिका घाट पर चल रहे बुलडोजर एक्शन का वीडियो साझा करते हुए लिखा कि बनारस में मणिकर्णिका घाट पर बुल्डोजर चलाकर सदियों पुरानी धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को ध्वस्त करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। मणिकर्णिका घाट और इसकी प्राचीनता का धार्मिक महत्व तो है ही, इससे लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर जी की स्मिृतियां भी जुड़ी हैं। विकास के नाम पर, चंद लोगों के व्यावसायिक हितों के लिए, देश की धार्मिक एवं ऐतिहासिक धरोहरों को मिटाना घोर पाप है। इसके पहले भी बनारस में रिनोवेशन के नाम पर कई सदी पुराने अनेक मंदिर ध्वस्त किए जा चुके हैं। काशी की धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान मिटाने की ये साजिशें तत्काल बंद होनी चाहिए। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी सरकार पर तीखा हमला बोला है।

उन्होंने मणिकर्णिका घाट पर हुई तोड़फोड़ के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया में साझा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल पूछा कि भोंडे सौंदर्यीकरण और व्यवसायीकरण के नाम पर आपने बनारस के मणिकर्णिका घाट में बुलडोज़र चलवाकर सदियों पुरानी धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को ध्वस्त कराने का काम किया है।

आप चाहतें हैं कि इतिहास की हर धरोहर को मिटाकर बस अपना नेम-प्लेट चिपका दिया जाएँ। पहले कॉरिडोर के नाम पर छोटे-बड़े मंदिर और देवालय तोड़े गए और अब प्राचीन घाटों की बारी है। खरगे ने लिखा है कि गुप्त काल में वर्णित जिस मणिकर्णिका घाट, जिसका लोकमाता अहिल्याबाई होलकर जी ने पुनरुद्धार करवाया उस दुर्लभ प्राचीन धरोहर को आपने रेनोवेशन के बहाने तुड़वाने का अपराध किया है।

काशी, दुनिया का प्राचीनतम शहर अध्यात्म, संस्कृति, शिक्षा और इतिहास का ऐसा संगम है जो पुरी दुनिया को अपनी ओर आकर्षित करता है। क्या इस सब के पीछे फिर से व्यावसायिक मित्रों को फ़ायदा पहुँचाने की मंशा है? जल, जंगल, पहाड़, सब आपने उनके हवाले किए हैं, अब सांस्कृतिक विरासत की बारी आ गई है।—देश की जनता के आपसे दो सवाल हैंकांग्रेस अध्यक्ष ने जनता की ओर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से सवाल पूछा है कि जीर्णोद्धार, साफ़-सफ़ाई और सौंदर्यीकरण विरासत को सहेज कर भी हो सकता था?पूरे देश को याद है संसद परिसर से आपकी सरकार ने किस तरह से महात्मा गाँधी, बाबासाहेब आंबेडकर समेत भारत की महान हस्तियों की प्रतिमाओं को बिना किसी राय-मशवरे के एक कोने में रखवा दिया। जलियाँवाला बाग़ मेमोरियल की दीवारों से इतिहास से हमारे स्वतंत्रता सेनानियों की कुर्बानियों को इसी रेनोवेशन के नाम पर मिटाया गया।मणिकर्णिका घाट में बुलडोज़र का शिकार बनी सैंकड़ों साल पुरानी मूर्तियों पर कुल्हाड़ी चलाकर उन्हें मलबे में क्यों डाला गया, किसी म्यूजियम में सँभाल कर रखा जा सकता था? । आपने दावा किया था — “माँ गंगा ने बुलाया है” आज आपने माँ गंगा को भुला दिया है। बनारस के घाट बनारस की पहचान हैं। क्या आप इन घाटों को जनता की पहुँच से दूर करना चाहते हैं? । लाखों लोग हर वर्ष काशी मोक्ष प्राप्ति के लिए अपने जीवन के अंतिम पड़ाव में आते हैं। क्या आपकी मंशा इन श्रद्धालुओं से विश्वासघात करने की है ?

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