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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 4:49 · नई दिल्ली संस्करण

यूपी : मनोज पांडेय का अखिलेश से सवाल, 'ब्राह्मणों का सम्मान या चुनावी दिखावा'

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
यूपी : मनोज पांडेय का अखिलेश से सवाल, 'ब्राह्मणों का सम्मान या चुनावी दिखावा'

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के खाद्य एवं रसद एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री मनोज कुमार पांडेय ने समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर ब्राह्मण समाज को लेकर दोहरी राजनीति करने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि एक ओर सपा नेताओं की ओर से ब्राह्मण समाज के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की जाती हैं और दूसरी ओर चुनावी राजनीति के तहत ब्राह्मण सम्मेलन आयोजित कर सम्मान का संदेश देने की कोशिश की जाती है।

मनोज पांडेय ने सवाल किया कि आखिर सपा की नीति ब्राह्मण समाज के सम्मान की है या फिर उसे केवल वोट बैंक के रूप में देखने की।

उन्होंने दावा किया कि प्रदेश की जनता अब दिखावे और वास्तविकता के बीच का अंतर समझ चुकी है तथा सामाजिक समरसता और सम्मान की राजनीति को प्राथमिकता दे रही है।

यूपी सरकार में मंत्री मनोज पांडेय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ''अखिलेश यादव जी, आखिर कहना क्या चाहते हैं? पहले ब्राह्मणों के खिलाफ माहौल बनाया जाता है।

पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समाज के बीच ब्राह्मणों को लेकर नकारात्मक संदेश दिया जाता है। आप स्वयं एक पत्रकार से उसका सरनेम पूछते हैं- 'क्या सरनेम लिखते हो?' जब वह अपना सरनेम 'मिश्रा' बताता है, तो आप उसे 'बाहर जाओ' कहकर सार्वजनिक रूप से अपमानित कर देते हैं।''

उन्होंने आगे लिखा कि इसके बाद आपकी पार्टी के एक वरिष्ठ प्रवक्ता ब्राह्मण समाज के लिए 'वेश्या' जैसा अत्यंत आपत्तिजनक शब्द इस्तेमाल करते हैं। उस बयान पर न आपका कोई खंडन आता है, न पार्टी की ओर से कोई आपत्ति या माफी। ऐसे में स्वाभाविक सवाल उठता है कि क्या आपकी पार्टी उस बयान से सहमत है? फिर अचानक ब्राह्मण सम्मेलन बुला लिया जाता है, लेकिन उसी सम्मेलन में आप स्वयं नहीं पहुंचते।

क्या यही सम्मान है? क्या ब्राह्मण समाज सिर्फ चुनाव के समय याद आता है? अखिलेश जी, आखिर आपकी नीति क्या है? ब्राह्मणों का सम्मान या उनका अपमान? समाज को जोड़ना या वोट के लिए जातियों को बांटना?

उन्होंने आगे कहा कि आज पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक और ब्राह्मण, सभी आपसे जवाब चाहते हैं।

एक तरफ समाजों के बीच अविश्वास पैदा करने की राजनीति, दूसरी तरफ चुनाव आते ही सम्मान का दिखावा- यह दोहरा चरित्र अब जनता के सामने है। पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक और ब्राह्मण, किसी को भी वोट बैंक मत समझिए। हवा का रुख बदल रहा है। सनातन समाज सम्मान, स्वाभिमान और सामाजिक समरसता के साथ एकजुट हो रहा है। जनता अब दिखावे और वास्तविकता का अंतर समझ चुकी है।

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