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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:42 · नई दिल्ली संस्करण

मुगल आक्रांता मोहम्मद गौरी के सेनापति शमशुद्दीन की अवैध मजार पर चलेगा बुलडोजर

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
मुगल आक्रांता मोहम्मद गौरी के सेनापति शमशुद्दीन की अवैध मजार पर चलेगा बुलडोजर

इटावा। उत्तर प्रदेश के इटावा जनपद में सैकड़ों वर्षों से बनी मुगल आक्रांता मोहम्मद गौरी के सेनापति शमशुद्दीन की मजार पर सरकारी बुलडोजर चलवाने की तैयारी वन विभाग ने कर ली है। वन विभाग ने मजार की जमीन को सरकारी होने का दावा करते हुए नोटिस चस्पा कर जमीन से संबंधित कागज दिखाने के लिए कहा है। नोटिस की समय अवधि में दस्तावेज न दिखाए जाने पर कानूनी कार्यवाही करने की चेतावनी दी गई है। मुस्लिम समाज के लोग इस मजार को बीहड़ वाले सैयद बाबा की मजार के नाम से बुलाते हैं। यहां हर वर्ष उर्स का आयोजन करते हैं और हर गुरुवार को मुस्लिम समाज के लोग बड़ी संख्या में पहुंचकर अकीदत पेश करते है।जिला वन अधिकारी विकास नायक ने बताया कि फिशर वन की सरकारी जमीन पर एक मजार अवैध तरीके से बनी होने की जानकारी प्राप्त हुई थी। जानकारी मिलने के बाद मजार से संबंधित लोगों को जमीन के कागज दिखाने के लिए मजार की देखभाल कर रहे फ़जले इलाही को नोटिस जारी की गयी। 22 जनवरी तक उनकी ओर से कोई भी अभिलेख नहीं दिखाए गए है। उन्होंने बताया कि वन रेंज अफसर अशोक शर्मा की और से दिए गए नोटिस में उन्हें जमीन से संबंधित अभिलेख दिखाने के लिए भरपूर समय दिया गया है। अभी तक कोई भी अभिलेख प्रस्तुत न कर पाने की वजह से अवैध मजार पर ध्वस्तीकरण की कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।उधर मजार पर हो रही कार्यवाही की जानकारी मिलने के बाद मुस्लिम समाज के लोगों में आक्रोश है। उन्होंने इकट्ठा होकर जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर कार्यवाही रुकवाने की मांग की है। उनका कहना है कि सैकड़ों वर्षों से इस मजार पर उर्स का आयोजन होता आ रहा है। वे लोग हर गुरुवार को सैयद बाबा की इस मजार पर पहुंचकर अकीदत पेश करते हैं।इतिहासकारों की मानें तो सन 1194 में इटावा में इस्लामी आक्रांता मोहम्मद गौरी और कन्नौज के राजा जयचंद के सिपहसालार सुमेर सिंह के बीच हुए तीक्ष्ण युद्ध में गौरी का सेनापति शमशुद्दीन दर्जनों आक्रांताओं के साथ मारा गया था। उनमें कुछ को बाइस ख्वाजा में दफनाया गया। शमशुद्दीन की मजार फिशरवन में कैसे बनी, इसकी कोई जानकारी नहीं है। समय के साथ-साथ बदले गए स्वरूप में फिशर वन में मजार का निर्माण धीरे-धीरे करके अवैध निर्माण कर लिया गया होगा।यह मजार इटावा सफारी पार्क से पहले फिशर वन के पार्ट तीन में करीब एक किलोमीटर कच्चा रास्ता तय करने के बाद स्थित है। यहां पर न केवल अवैध मजार का निर्माण किया गया है बल्कि एक पहाड़ीनुमा टीले पर बड़ी ऊंचाई तक पक्की सीढ़ियों का निर्माण किया गया है जिससे यहां पर आने वाले अकीतमंदों को सहूलियत हो सके।

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