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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:42 · नई दिल्ली संस्करण

यूपी कैबिनेट: वृद्धावस्था पेंशन के लिए लिए अलग से आवेदन करने की जरूरत नहीं, विभाग खुद करेगा संपर्क

राष्ट्रीय सागर डेस्क4 मिनट का पठन
यूपी कैबिनेट: वृद्धावस्था पेंशन के लिए लिए अलग से आवेदन करने की जरूरत नहीं, विभाग खुद करेगा संपर्क

लखनऊ। उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने राज्य में वृद्धावस्था पेंशन को लेकर एक बड़ा निर्णय लिया है। अब पात्र वरिष्ठ नागरिकों को पेंशन के लिए अलग से आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी। समाज कल्याण मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने बताया कि फैमिली आईडी ‘एक परिवार-एक पहचान’ प्रणाली से पात्र लाभार्थियों का स्वतः चिन्हीकरण होगा और उनकी सहमति मिलने पर पेंशन सीधे स्वीकृत की जाएगी।

वर्तमान में 67.50 लाख वरिष्ठ नागरिक इस योजना का लाभ ले रहे हैं, लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी हैं जो प्रक्रिया पूरी न कर पाने के कारण पेंशन से बाहर रह जाते हैं।

नया फैसला इसी समस्या को हल करने पर केंद्रित है। नई व्यवस्था में फैमिली आईडी के आधार पर उन नागरिकों की सूची स्वतः तैयार होगी जिनकी आयु अगले 90 दिनों में 60 वर्ष होने जा रही है। यह सूची एपीआई के माध्यम से समाज कल्याण विभाग के पेंशन पोर्टल पर भेजी जाएगी। विभाग सबसे पहले एसएमएस, व्हाट्सऐप और फोन कॉल जैसे डिजिटल माध्यमों से पात्र नागरिकों से सहमति लेगा। जिनकी सहमति डिजिटल रूप से नहीं मिलेगी, उनसे ग्राम पंचायत सहायक, कॉमन सर्विस सेंटर या विभागीय कर्मचारी भौतिक रूप से संपर्क करेंगे।

दोनों स्तरों पर सहमति न मिलने पर ऐसे नाम प्रक्रिया से हटा दिए जाएंगे।

उन्होंने बताया कि सहमति मिलने के बाद योजना अधिकारी 15 दिनों के भीतर डिजिटल सिग्नेचर के माध्यम से पेंशन स्वीकृत करेंगे और स्वीकृति पत्र लाभार्थी को डाक से भेजा जाएगा। भुगतान सीधे आधार-लिंक्ड बैंक खाते में किया जाएगा और हर किस्त की जानकारी एसएमएस द्वारा उपलब्ध होगी। सरकार एक मोबाइल ऐप भी उपलब्ध कराएगी, जिसमें लाभार्थी पासबुक की तरह अपने सभी भुगतान देख सकेंगे।

प्रदेश कैबिनेट ने दुकान और वाणिज्य अधिष्ठान अधिनियम 1962 में महत्वपूर्ण संशोधन को मंजूरी देते हुए इसकी सीमा नगरीय क्षेत्रों से बढ़ाकर पूरे प्रदेश तक कर दी है। अब राज्य के सभी जिलों और ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिष्ठान भी इस कानून के दायरे में आएंगे। इससे अधिकतम श्रमिक कानूनी संरक्षण के दायरे में आएंगे और उनके अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित होगी।

श्रम मंत्री अनिल राजभर ने बताया कि संशोधन के तहत यह अधिनियम अब उन प्रतिष्ठानों पर लागू होगा जिनमें 20 या उससे अधिक कर्मकार कार्यरत हैं। इससे छोटे प्रतिष्ठान बिना अतिरिक्त बोझ के अपनी आर्थिक गतिविधि को सुचारू रख सकेंगे, जबकि बड़े प्रतिष्ठानों में कार्यरत कर्मचारियों को अधिनियम के तहत मिलने वाले सभी लाभ मिलेंगे।

सरकार का मानना है कि इससे प्रदेश में व्यापारिक गतिविधियां और तेज होंगी। उन्होंने बताया कि संशोधन का दायरा बढ़ाते हुए सरकार ने चिकित्सकीय इकाइयों जैसे क्लीनिक, पॉलीक्लीनिक, प्रसूति गृह, आर्किटेक्ट, कर सलाहकार, तकनीकी सलाहकार, सेवा प्रदाता, सेवा मंच और इसी तरह के अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को भी कानून के अंतर्गत शामिल कर दिया है। इससे इन प्रतिष्ठानों में काम करने वाले कर्मचारियों को भी सुरक्षित कार्य परिस्थितियों और लाभों का अधिकार प्राप्त होगा।

कैबिनेट ने लेखपाल सेवा नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए चैनमैन के लिए लेखपाल पद पर पदोन्नति का मार्ग खोल दिया है। वित्त मंत्री सुरेशा खन्ना ने बताया कि पंचम संशोधन नियमावली 2025 के तहत अब लेखपाल के कुल पदों में से दो प्रतिशत पद योग्य चैनमैन को पदोन्नति के आधार पर दिए जा सकेंगे।

यह पहली बार है जब चैनमैन को सीधी भर्ती व्यवस्था से बाहर निकलकर लेखपाल पद तक प्रमोशन का अवसर मिलेगा। वर्तमान में लेखपाल के सभी पदों पर भर्ती अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के माध्यम से की जाती है। प्रदेश में कुल 30837 स्वीकृत पदों में से 21897 पर तैनाती है, जबकि 8940 पद रिक्त हैं। नई व्यवस्था के तहत वे चैनमैन पदोन्नति के लिए पात्र होंगे जो मौलिक रूप से इसी पद पर नियुक्त हों, भर्ती वर्ष के पहले दिन तक छह वर्ष की सेवा पूरी कर चुके हों और इंटरमीडिएट या समकक्ष परीक्षा पास कर चुके हों।

इन पात्र चैनमैन का चयन चयन समिति की सिफारिश पर किया जाएगा।

सरकार का कहना है कि अनुभवी चैनमैन को लेखपाल के रूप में पदोन्नत करने से न सिर्फ विभाग की कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि जमीनी स्तर पर योजनाओं का क्रियान्वयन भी और तेज होगा। इससे आम जनता को राजस्व विभाग की सेवाएं समय पर और अधिक दक्षता के साथ मिल सकेंगी।

वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि मंत्रिपरिषद ने जनपद बागपत में पीपीपी मोड पर मेडिकल कॉलेज स्थापित करने के लिए 5.07 हेक्टेयर भूमि निःशुल्क चिकित्सा शिक्षा विभाग को हस्तांतरित करने के प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है। यह भूमि ग्राम मीतली में स्थित है और मत्स्य विभाग के पास थी। विवादित 0.53 हेक्टेयर हिस्से को छोड़कर शेष भूमि पर कॉलेज का निर्माण किया जाएगा। बता दें कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश के 60 जिलों में राजकीय और निजी क्षेत्र के कुल 80 मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं, लेकिन बागपत अब तक इस सुविधा से वंचित था।

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